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मजबूर होकर आबादी क्षेत्र में घुसते हैं तेंदुए, जानिए बार-बार अलवर शहर में क्यों आ रहा है पैंथर?

गर्मी का मौसम शुरू होते ही पैंथर दो बार अलवर शहर के आबादी क्षेत्रों में पहुंच चुका है, वहीं तीन बार इसके आबादी क्षेत्रों में आने की चर्चा रही है।
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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 04, 2019

Reason Of Panther Coming In Alwar City

मजबूर होकर आबादी क्षेत्र में घुसते हैं तेंदुए, जानिए बार-बार अलवर शहर में क्यों आ रहा है पैंथर?

जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों से पैंथरों का शहर के आबादी क्षेत्र में पलायन न केवल शहरवासियों की चिंता का कारण है, बल्कि संभावित बड़े खतरे का संकेत भी है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पैंथर दो बार अलवर शहर के आबादी क्षेत्रों में पहुंच चुका है, वहीं तीन बार इसके आबादी क्षेत्रों में आने की चर्चा रही है। बार-बार आबादी क्षेत्रों में पैंथरों की आवाजाही ने वन विभाग एवं सरिस्का प्रशासन के समक्ष बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मी में वन्यजीवों के लिए पानी व भोजन की कमी एक सामान्य समस्या है। इस कारण कई बार पैंथर एवं अन्य वन्यजीव जंगल व पहाड़ी क्षेत्र से उतर कर आबादी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। लेकिन कई और भी कारण है जो पैंथर को आबादी क्षेत्र में पलायन के लिए मजबूर करते हैं।

बढ़ गई है संख्या

अलवर शहर में आने वाले पैंथर अलवर बफर जोन स्थित बाला किला क्षेत्र के हैं। यहां पिछले कुछ सालों में पैंथरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
मौटे तौर पर इन दिनों बफर जोन में 18 से 20 पैंथर हैं। इतनी संख्या में पैंथर होने के कारण उनमें टैरिटरी का संघर्ष का छिडऩे लगा है, नतीजतन पैंथर जंगल से पलायन करने को मजबूर होने लगा है। इनमें भी नर पैंथरों की संख्या ज्यादा है। पिछले दिनों 15 मार्च को स्कीम नम्बर एक आर्यनगर में आया पैंथर भी नर था, जबकि बुधवार को जयकृष्ण क्लब में आया पैंथर भी नर था। इससे पूर्व भिवाड़ी, नगर एवं अन्य स्थानों पर पहुंचा पैंथर भी नर ही था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार टैरिटरी के संघर्ष में नर पैंथर ही ज्यादातर बार बाहर निकलता है, मादा पैंथर दूसरे नर पैंथर की टैरिटरी में सहजता से रहने लगती है।

वन भूमि पर अतिक्रमण बढ़ा

अलवर बफर जोन स्थित चोर डूंगरी से लेकर अखैपुरा, लालखान, प्रतापबंध, अंधेरी, बुद्धविहार, धोबीगट्टा सहित अन्य पहाड़ी व जंगल क्षेत्र में वन भूमि पर बड़ी मात्रा में पक्के निर्माण होने से अतिक्रमण की समस्या बढ़ी है। वन्यजीवों के क्षेत्र में लोगों की ओर से पक्के मकान का निर्माण करने से उनके स्वच्छंद विचरण में समस्या उत्पन्न हो गई। इस कारण पैंथरों का पलायन आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ गया। अकेले अलवर बफर क्षेत्र में करीब तीन दशकों से वन भूमि पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण हुए हैं। वन विभाग व सरिस्का प्रशासन वन भूमि पर होने वाले अतिक्रमण को रोक पानेे में विफल रहा। इसका नतीजा अब पैंथरों का आबादी क्षेत्र में पलायन के रूप में दिखाई पड़ रहा है।

पक्के निर्माण की जांच
वनभूमि पर अतिक्रमण की समस्या है। वन भूमि पर पक्के निर्माण की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
आलोक नाथ, डीएफओ, वन मंडल अलवर