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युवाओं को यह असमंजस है कि रीट परीक्षा होगी या नही

अलवर. प्रदेश में शिक्षक को कॅरियर बनाने वाले लाखों युवाओं को अब सरकार के एक निर्णय का इंतजार है। पूर्व राज्य सरकार की ओर से चलाई गई रीट को वर्तमान सरकार फिर से लागू करेगी, इसको लेकर संशय बना हुआ है। इस मामले में सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
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अलवर

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Hiren Joshi

Mar 07, 2019

reet exam in rajasthan

युवाओं को यह असमंजस है कि रीट परीक्षा होगी या नही


सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि राज्य में रीट लागू रखेगी या अन्य कोई विकल्प आएगा। इसको लेकर युवाओं में असमंजस है। युवाओं को यह असमंजस है कि रीट परीक्षा होगी या नही? और इसका सिलेबस क्या होगा। एनटीटी के नियमानुसार शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा एक वर्ष में दो बार होनी चाहिए, जबकि राज्य सरकार ऐसा नहीं कर रही है।
इससे पूर्व प्रदेश में आरटैट पात्रता परीक्षा होती थी जिसके बाद नौकरी के लिए दूसरी परीक्षा देनी होती थी। यदि आरटैट दुबारा से लागू होता है तो नौकरी के लिए दो बार परीक्षा देनी होगी। प्रदेश में आरटैट परीक्षा 2011, 2012 और 2013 में हुई थी जबकि रीट परीक्षा 2015 और 2017 में हुई है।
सरकार बदलते ही बदल
गया परीक्षा का पैटर्न
पूर्व में राज्य सरकार आरटैट 2011 से 2013 तक आयोजित करती रही है जबकि रीट परीक्षा 2015 और 2017 में हुई।
सभी सरकारों का भर्ती परीक्षा का पैटर्न अलग-अलग ही था। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में रीट की विसंगितयों को दूर करने की बात कही थी जिसके आधार पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्तमान सरकार इसमें कोई फेरबदल कर सकती है।
प्रदेश में इससे करीब 11 लाख युवा प्रभावित होंगे। इनमें बीएड धारी युवा 8 लाख और 3 लाख एसटीसी धारक युवा शामिल हैं। सरकार के पात्रता परीक्षा के पैटर्न को स्पष्ट करने से युवा शिक्षक बनने की तैयारी करेंगे।
युवा कर रहे थे प्रदेश स्तरीय मैरिट बनाने की मांग
एकीकृत बेरोजगार महासंघ की ओर से विधानसभा चुनाव से पहले से ही शिक्षक भर्ती के लिए प्रदेश स्तरीय एक मैरिट बनाने की मांग कर रहे है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेन यादव के अनुसार यह परीक्षा आरपीएससी के माध्यम से कराने की मांग की जा रही है जिससे राजस्थान से सम्बन्धित प्रश्नों का अधिकाधिक समावेश हो। यह परीक्षा टैट की तरह होनी चाहिए जिससे राजस्थान के युवा अधिक से अधिक नौकरी प्राप्त कर सके। इसमें स्नातक के अंक भी नहीं जोडऩे की मांग की गई है।