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बाघों की सुरक्षा को नहीं कर्मचारी, सरिस्का बर्बादी की राह पर

अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना फिर से वर्ष 2005 की बर्बादी की राह पर लौटने को मजबूर है। सरकार ने सरिस्का का क्षेत्राधिकार तो बढ़ाया, लेकिन इसकी सुरक्षा करने वाले कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि के बजाय और कमी हो गई। यह स्थिति तो तब है जब वीपी सिंह कमेटी ने बाघ पुनर्वास से पूर्व यहां एक बीट पर कम से कम तीन वनकर्मियों की तैनाती को जरूरी बताया, लेकिन यह शर्त सरकार अब तक पूरी नहीं कर पाई है।
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अलवर

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Prem Pathak

Feb 21, 2019

sariska news

बाघों की सुरक्षा को नहीं कर्मचारी, सरिस्का बर्बादी की राह पर

सरिस्का बाघ परियोजना वर्ष 2005 में बाघ विहिन होकर बर्बादी का मंजर देख चुका है और सरकार इस नेशनल पार्क को फिर उसी बर्बादी की ओर लौटने से रोकने के प्रति गंभीर नहीं दिखती। यह हाल तो तब है जब सरिस्का प्रशासन एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार इस समस्या से विभागीय उच्चाधिकारियों व सरकार को अवगत करा चुका है।

इसलिए लौट रहा सरिस्का बर्बादी की राह पर

सरिस्का 1213 वर्ग किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में फैला है और इसकी सुरक्षा के लिए वर्तमान में 400 से ज्यादा कर्मचारियों व अधिकारियों की जरूरत है। इसके विपरीत यहां वर्तमान में 225 कर्मी ही उपलब्ध हैं। इनमें 62 कर्मचारी वर्कचार्ज के हैं, जिनकी उम्र 50 साल के पार है। जबकि वर्ष 2005 में सरिस्का में अकेले वर्कचार्ज कर्मचारियों की संख्या 173 थी, वहीं 250 से ज्यादा विभाग का नियमित स्टाफ था। इतना ही नहीं वर्ष 2005 में सरिस्का बाघ परियोजना में अलवर बफर व अजबगढ़ रेंज भी शामिल नहीं थी, यानि कम क्षेत्र होने के बाद भी उस दौरान नियमित व वर्कचार्ज कर्मियों की संख्या वर्तमान से दो गुनी से ज्यादा थी। इसके बाद भी शिकारियों ने यहां 20 से ज्यादा बाघों का सफाया कर दिया था।

वर्तमान में यह है सरिस्का की समस्या
वर्तमान में सरिस्का की समस्या यह है कि यहां नियमित कर्मचारियों के ९१ पद रिक्त हैं। इनमें डीएफओ विस्थापन, एसीएफ, रेंजर ग्रेड प्रथम, रेंजर ग्रेड द्वितीय, फोरेस्टर, सहायक वनपाल सहित वन गार्डों के पद शामिल हैं। खास बात यह कि किसी भी पार्क की सुरक्षा का बड़ा दायित्व रेंजर ग्रेड प्रथम, रेंजर ग्रेड द्वितीय व वनपाल पर रहता है। सरिस्का में वर्तमान में एक भी रेंजर ग्रेड प्रथम नहीं है, वहीं रेंजर ग्रेड द्वितीय के भी कई पद खाली हैं। वहीं फोरेस्टर के करीब १० पद स्वीकृत हैं, जिनमें भी ६ वनपाल गत छह माह से ज्यादा समय से प्रशिक्षण के लिए बाहर गए हैं।

वीपी सिंह कमेटी ने यह की थी सिफारिश

वर्ष 2005 में सरिस्का को बाघ विहिन घोषित करने के बाद वीपी सिंह कमेटी ने सरिस्का को आबाद करने के लिए कई सिफारिशें की थी, इनमें सबसे बड़ी सिफारिश बाघ पुनर्वास के लिए सरिस्का की एक बीट पर कम से कम 3 सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति जरूरी बताई गई थी, तभी बाघों का यहां सुरक्षित रह पाना संभव माना गया था। कमेटी की रिपोर्ट पर भी सरकार ने गौर नहीं किया और हर साल सरिस्का में सुरक्षाकर्मियों की संख्या गई।

सरिस्का में 102 बीट व आधा दर्जन से ज्यादा नाके
सरिस्का में वर्तमान में 6 रेंजों में 102 बीट निर्धारित हैं। वहीं कई नाके व बैरियर हैं। वीपी कमेटी के आधार पर 102 बीटों पर 306 वनकर्मी, नाकों पर 3-4 वनकर्मी, बैरियर पर तीन कर्मचारी जरूरी है। वहीं वाइल्ड लाइफ सर्विलांस सिस्टम पर तीन कर्मचारी, वायरलैस सिस्टम पर 10 से 15 कर्मचारी की नियुक्ति जरूरी है। वहीं सरिस्का में 11 टाइगर व 8 शावक हैं। इन दिनों टाइगर व बाघिन एसटी-12 के शावकों की मॉनिटरिंग में भी 35 से ज्यादा कर्मचारी तैनात रहते हैं।

उच्चाधिकारियों को लिखित में कराया अवगत

सरिस्का में सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की कमी की समस्या से विभागीय उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। वर्तमान में सरिस्का में 91 कर्मियों के पद रिक्त हैं।
हेमंत सिंह

डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना अलवर