5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चेतना लौटने के बाद पानी मिल जाता तो बच सकती थी बाघ की जान!

बाघ एसटी-16 की मौत अकबरपुर रेंज के रोटक्याला जंगल में नाहरकुण्डा नाला के पास हुई- आसपास नहीं था पानी, गर्मी व टे्रंक्यूलाइज डोज को नहीं कर पाया सहन
2 min read
Google source verification

अलवर

image

Prem Pathak

Jun 10, 2019

sariska tiger st 16 deth news

चेतना लौटने के बाद पानी मिल जाता तो बच सकती थी बाघ की जान!

अलवर ग्रामीण. सरिस्का में बाघ एसटी-16 की मौत अकबरपुर रेंज के बालेटा नाका रोटक्याला बीट स्थित नाहर कुंड नाला पर हुई। जगह के नाम के साथ भले ही नाला जुड़ा हो, लेकिन इन दिनों उसके आसपास पानी नहीं है।

सरिस्का में बाघ एसटी-16 को ट्रेंक्यूलाइज किया गया, संभवत: ओवरडोज व गर्मी के कारण चेतना में आने के बाद बाघ पानी की तलाश में कुछ ही दूरी तय कर पाया। पानी नहीं मिल पाने से वह सूखे पेड़ों तले ही बैठ गया और पानी की कमी के चलते उसकी मौत हो गई। सरिस्का अभयारण्य का रोटक्याला क्षेत्र अन्य स्थानों के बजाय प्रचुर मात्रा में पानी वाला क्षेत्र माना जाता है। लेकिन तेज गर्मी में यहां बने वाटर होल्स सूख गए। इससे क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए पानी की समस्या बढ़ गई है। पानी के अभाव में सांभर, चीतल, बारहसिंघा सहित नीलगाय व जंगली सूअर, तीतर, बटेर, मोर भी प्यास बुझाने के लिए इधर- उधर भटकने को मजबूर हैं। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपए बजट के स्वीकृत करती है, फिर भी सरिस्का में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छोटे वन्यजीव ही नहीं, बाघ भी मौत के मुंह में समा रहे हैं।

जिले में इन दिनों तापमान 46 डिग्री के आसपास है। एेसी भीषण गर्मी में बाघ को टे्रंक्यूलाइज करना खतरे से भरा था। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी में बाघ या अन्य वन्यजीव को ठण्डे स्थान पर ट्रेंक्यूलाइज करना होता है। वहीं ट्रेंक्यूलाइज के दौरान उस पर पानी का लगातार स्प्रे होना जरूरी है। ट्रेंक्यूलाइज स्थल के आसपास पानी की प्रचुर मात्रा होनी चाहिए, जिससे चेतना आने के बाद वन्यजीव को पानी मिल सके। टें्रक्यूलाइज के लिए इस्तेमाल दवा के डोज व गर्मी के असर के चलते वन्यजीव के लिए पानी जरूरी होता है। पानी के अभाव में वन्यजीव की मौत हो सकती है।