
गैर सरकारी स्कूलों के संचालकों को बच्चों की जान की परवाह नहीं
अधिकतर स्कूली वाहन चल रहे बिना परमिट के
अलवर. जिले के गैर सरकारी स्कूलों के संचालकों को बच्चों की जान की परवाह तक नहीं है। हालात यह है कि जिले में गैर सरकारी स्कूलों की संख्या २ हजार से अधिक है लेकिन इनमें रजिस्टर्ड वाल वाहिनी की संख्या ११०६ ही है। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल बाल वाहिनी के लिए बनाए गए नियमों की पालना तक की परवाह नहीं है। अलवर जिले में गैर सरकारी स्कूलों में अवैध रूप से चलने वाले वाहनों से ही बच्चों को स्कूल लाया और घर छोड़ा जा रहा है। अलवर जिले के गैर सरकारी स्कूलों में चलने वाले वाहनों की संख्या ५ हजार से कम नहीं है जबकि इनमें से वाल वाहिनी के रूप में रजिस्ट्रेशन मात्र ११०६ वाहनों का ही है।
बच्चों की जान की परवाह नहीं : अलवर जिले में बच्चों को स्कूल लाने के तरीके पर प्रशासन भी चिंता जाहिर कर चुका है। कई बार ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है और उनकी फिटनेस की जांच तक भी नहीं कराई जाती है।
शिक्षा विभाग ने बाल वाहिनी के लिए स्कूल संचालक, चालक, सहायक के लिए नियम बनाए हैं जिनकी पालना नहीं की जाती है। इनमें मुख्य यह नियम हैं कि जो भी वाहन स्कूलों में काम में लिए जाए, उनका रंग पीला होना चाहिए। इन पर ऑन स्कूल डयूटी अंकित होना चाहिए। इसी प्रकार बाल वाहिनी की समय -समय पर मरम्मत व रखरखाव आवश्यक है। इनका पंजीकरण परिवहन कार्यालय में बाल वाहिनी के रूप में होना आवश्यक है। इनमें प्रदूषण मुक्ति का प्रमाण पत्र हो या इनमें सीढि़या हो। इसी प्रकार इन वाहनों में प्राथमिक उपचार पेटी रखी जाए और पेयजल का प्रबंध हो। बाल वाहिनी में रोशनी और हवा का उचित प्रबंध हो, आपातकालीन दरवाजा, उचित बैठक व्यवस्था, सहायक की व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र, बाल वाहिनी में जीपीएस लगा हो तथा इनका फिटनेस परीक्षण समय-समय पर होना चाहिए।
Published on:
28 Feb 2019 01:10 pm
