
डेंगू व मलेरिया के बाद अलवर में मंडराने लगा इस बीमारी का खतरा, चिकित्सा विभाग में मचा हडक़ंप
अलवर. डेंगू और मलेरिया के बाद अब जिले में स्क्रब टाइफस बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। लोग इसके नाम से ही डरने लगे हैं। वर्ष 2011 में यह बीमारी सामने आई थी। स्क्रब टाइफस के लिए सर्तकता बरतने की जरुरत है। यह रोग पिस्सुओं के काटने से होता है। चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक जिले में स्क्रब टाइफस के 18 मामले सामने आ चुके हैं। अब अलवर शहर में भी इस रोग ने एक युवक को अपनी चपेट में ले लिया है।
सामोला गांव मंगलम बिल्डिंग के प्लाट नंबर 29 में रहने वाले 21 वर्षीय मोहित नरूका को सिरदर्द, लगातार बुखार रहने के बाद शरीर में सूजन आने लगी। यहां तक कि उनके हाथ पैर भी टेडे हो गए। सामान्य इलाज के बाद भी जब कोई फायदा नहीं हुआ तो उन्हें अलवर के एक निजी अस्तपताल में भर्ती कराया गया। वहां उनकी प्लेटसलेट्स कम हो गई। बाद में उनके पिता विक्रम सिंह नरूका ने युवक को जयपुर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। वहां जांच के बाद पता चला कि उनको निमोनिया है और फेफडों में पानी भर गया है। वहां युवक की हालत अधिक खराब होने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया। युवक का इलाज कर रहे डॉ. बीके मालपानी ने बताया कि उन्हें स्क्रब टाइफस है। यदि इस पर समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह जानलेवा भी हो सकता है।
इस तरह पहचानें स्क्रब टाइफस को
स्क्रब टाइफस रोग के पीडि़त को मच्छर के काटने पर त्वचा पर काले रंग का निशान पड़ जाता है। इस रोग के होने की आशंका उन लोगों में अधिक होती है जो खेतों में काम करते हैं या फिर पशुओं के निरंतर संपर्क में रहते हैं। यह पिस्सुओं के काटने से होता है। इसलिए जिस जगह पर ज्यादा पिस्सू पाए जाते हैं, वहां के लोगों को त्वचा व कपड़ों पर कीट भगाने वाली क्रीम का स्प्रे करना चाहिए।
शहर का पहला मामला
स्क्रब टाइफस का अलवर शहर में पहला मामला है। जिस क्षेत्र में रोगी मिला है वहां टीम भेजकर आसपास के घरों का सर्वे करवाया जाएगा। वहां डॉक्सी साइक्लिन दवा दी जाएगी। जिले में इस रोग के अभी तक 18 मामले आए हैं।
डॉ. बबीता सिंह, जिला महामारी नियंत्रक, अलवर।
Published on:
20 Aug 2018 01:33 pm
