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55 साल की सोहन बाई ने हर सप्ताह जोड़े 10 रुपए, अब गांव की कई महिलाओं को दिलवाया रोजगार, महिला दिवस पर पढ़ें यह विशेष स्टोरी

महिला दिवस पर पढ़ें महिला सशक्तिकरण की ये कहानी, अशिक्षित होकर भी सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।
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अलवर

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Hiren Joshi

Mar 08, 2019

Sohan Bai Of Alwar Change Life Of Women Of Her Village

55 साल की सोहन बाई ने हर सप्ताह जोड़े 10 रुपए, अब गांव की कई महिलाओं को दिलवाया रोजगार, महिला दिवस पर पढ़ें यह विशेष स्टोरी

अलवर. अलवर शहर से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव की सालपुरी। इस गांव में विभिन्न जातियों के 450 से 500 परिवार रहते हैं, यहां रहती है सोहनबाई। 55 साल की सोहनबाई ने अशिक्षित होने के बावजूद गांव की महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। इन्होंने मात्र 10 रुपए की साप्ताहिक बचत से स्वयं सहायता समूह का गठन किया और अपने साथ साथ गांव की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना दिया । उन्होंने बताया कि मेरी जब शादी हुई थी तो उम्र मात्र 16 साल की थी। घर की आर्थिक स्थिति अ‘छी नहीं थी, इसलिए घर चलाने के और ब"ाों को पढ़ाने के लिए अपनी खेती की जमीन बेचनी पड़ी और एक समय एेसा भी आया कि पेट भरने के लिए दूसरों के खेतों में फसल काटने की मजदूरी करने लगी। यहां तक की घरेलू जरुरतों से साहुकार से पैसे उधार लेने पड़ते थे। कर्ज ना चुकाने पर कई बार शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती थी। इन्हीं दिनों इब्तिदा संस्था के कार्यकर्ता हरदीप और दिनेश सालपुरी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह का गठन करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में घर परिवार में इसका विरोध हुआ लेकिन बाद में सबको उपयेागिता समझ में आ गई। शुुरुआत में 10 रुपए प्रति सप्ताह जमा करवाकर अपनी बचत शुरु की । समूह की गुणवत्ता और प्रगति के आधार पर 15000 रुपए का लोन बैंेक से मिला। लोन का पैसा समूह के सभी सदस्यों में बराबर बांटा गया।

सोहनबाई ने अपने हिस्से के पैसे आधा बीघा जमीन किराए पर ली, उस पर खेती की और समूह का लोन चुका दिया। समूह बनाने के एक साल बाद ही इन्होंने 50 रुपए की प्रतिमाह बचत करना शुुरू कर दी। समूह की अन्य महिलाओं ने प्रेरणा ली और उन्होंने भी अपनी बचत 100 रुपए प्रतिमाह कर दी। जिससे की वह भी ’यादा पैसा जमा करा सकें। कई महिलाओं ने पैसे जमा कर अपने लघु उद्योग खोले। अब सोहनबाई की वजह से कई महिलाएं आत्मनिर्भर हैं। अब उन्हें किसी से पैसे नहीं मांगने पड़ते। गांव में अब सब सोहन बाई की सराहना करते हैं, जिन्होंने मात्र 10 रुपए प्रति माह जोडक़र अब महिलाओं को रोजगार के संसाधन खुलवाए हैं।