उन्होंने राजस्व विभाग को पत्र लिखकर अपनी जमीन मांगी है। यह 1947 में आरक्षित वन क्षेत्र बनाया गया था। वर्ष 1980 में इसे सेंचुरी का दर्जा दिया गया। राजस्थान राजपत्र के अनुसार 1961 में आमेर के 39 गांवों की 12,374 हैक्टेयर जमीन इसमें शामिल कर दी गई थी। बाकी 511 हैक्टेयर शेष है। सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के निर्देश पर इसका म्यूटेशन करने की तैयारी हो रही है।