5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दीपावली पर बिकते हैं उम्मीदों के दीपक, कुंभकारों ने सजाए अरमान

दीपावली पर बिकते हैं उम्मीदों के दीपक, कुंभकारों ने सजाए अरमान मदन को करनी है बेटी की शादी, कमला को पढ़ाने हैं बच्चे, मिट्टी के आइटम बिकने पर ही पूरे होंगे अरमान, इस बार चायनीज लाइट खरीदने के बजाय मिट्टी के दीपक से करें रोशन त्योहार
2 min read
Google source verification
दीपावली पर बिकते हैं उम्मीदों के दीपक, कुंभकारों ने सजाए अरमान

दीपावली पर बिकते हैं उम्मीदों के दीपक, कुंभकारों ने सजाए अरमान

मदन को करनी है बेटी की शादी, कमला को पढ़ाने हैं बच्चे, मिट्टी के आइटम बिकने पर ही पूरे होंगे अरमान, इस बार चायनीज लाइट खरीदने के बजाय मिट्टी के दीपक से करें रोशन त्योहार
अलवर. दीपावली केवल रोशनी और आतिशबाजी का ही त्योहार नहीं है, बल्कि यह उम्मीदों का भी त्योहार है। अलवर शहर में रहने वाले करीब ८०० कुंभकार परिवारों की रोजी रोटी दीपावली पर बिकने वाले मिट्टी के दीपक व अन्य आइटमों से जुड़ी हैं। यही कारण है ये परिवार साल भर दीपावली त्योहार आने की बाट जोहते हैं।
दीपावली त्योहार नजदीक आते ही कुंभकारों के परिवारों के सदस्य मिटटी के दीपक व अन्य आयटम बनाने में जी जान से जुटे हुए हैं। दीपावली को लेकर सबने अरमान भी सजाएं हैं। इन परिवारों की उम्मीद रहती है कि साल भर में जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा दीपावली पर हो जाए तो परिवार के सपने भी साकार हो सकें। दीपावली पर हर घर में अरमानों के दीपक जल रहे हैं। दीपावली पर किसी को बच्चों की शादी तो कुछ को अच्छे संस्थानों में बच्चों के प्रवेश की उम्मीद रहती है। दीपावली के लिए कई महीनों तक मेहनत करने के बाद भी एक परिवार को एक त्योहार पर मुश्किल से १० से १५ हजार रुपए की आमदनी ही हो पाती है। कुंभकारों की मेहनत और उम्मीदों की पूर्ति के लिए लोगों में दीपोत्सव पर मिट्टी के दीपक जलाने का चलन बढऩे लगा है। मिट्टी के दीपक जलाने से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही पौराणिक मान्यताओं &दीपावली पर दो महीने काम अच्छा चलता है, घर के सभी लोग मिलकर मेहनत करते हैं। इस बार मुझे मेरी बहन की शादी करनी है। यदि मिट्टी के दीए और अन्य सामान अच्छी कीमत पर बिकता है तो शादी बहुत अच्छी तरह से होगी।
पिंटू प्रजापत, रंग भरियों की गली
&मेरे दो बच्चे हैं। बेटी दसवीं में हैं और बेटा बीए कर रहा है। इस बार दीपावली से बहुत उम्मीद लगाई हुई है। यदि अच्छी कमाई होगी तो अगले साल बेटी को अच्छे स्कूल में एडमिशन दिलवाऊंगी, बेटे को भी नया काम करवाऊंगी।
-सोना, काला कुआं
&पिछले कई दिनों से मिट्टी के बर्तन बना रही हूं, खाना पीना भी छोड़ा हुआ है। इस बार दीपावली पर मेरे सारे दीपक, लक्ष्मी, गणेश, गूजरी, घोडा आदि आइटम बिक जाए। जिससे कि बेटी के दहेज के लिए ज्यादा सामान खरीद सकूं।
-गीता प्रजापत, टोली का कुआंको भी बल मिलता है।
यहां बसते हैं कुंभकार परिवार
&अलवर शहर के अशोका टाकीज, चांवड पाडी, देहली दरवाजा, मालाखेडा बाजार, रोड नंबर दो, एसएमडी चौराहा, रंग भरियों की गली, टोली का कुआं, खटीक पाडी, गोपाल टाकीज के पीछे, स्वर्ग रोड, देसूला, बख्तल की चौकी, काला कुआं, शिवाजी पार्क सहित अन्य जगहों पर कुंभकार परिवार बसे हुए हैं।
मिटटी से चलता है जीवन
&अलवर में करीब ८०० कुंभकार परिवार रहते हैं। जिनका जीवन मिट्टी से ही चलता है। अब लोग मिटटी के दीए व अन्य आइटम कम ही खरीदते हैं। इससे रोजी रोटी पर संकट आ गया है। बेचने के लिए जगह भी नहीं है। बिजेंद्र ठेकेदार, जिलाध्यक्ष, प्रजापति नवयुवक समिति, अलवर
&मेरी बेटी बीए कर रही है, मुझे इस साल बेटी की शादी करनी है, लेकिन पैसों का पूरा इंतजाम नहीं हो पा रहा हैं। इसलिए पिछले तीन महीने से लगातार मेहनत कर रहा हं्र जिससे कि दीपावली पर ज्यादा सामान बेच सकूं। यदि इस बार ज्यादा कमाई होती है तो बेटी की सगाई कर दूंगा
मदन प्रजापत, टोली का कुआं