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शहर में 48 साल से खाली पड़ी बेशकीमती जमीन, यूआइटी 50 बीघा में नहीं बसा पाई कॉलोनी

यूआइटी का काम शहर में लोगों को मकान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन इस काम में यूआइटी फेल नजर आ रही है। शहर में करीब 50 बीघा जमीन ऐसी है, जो 48 साल से खाली पड़ी है। यूआइटी न इस जमीन पर कॉलोनी बसा पाई और न ही पुरानी चार कॉलोनियों का विस्तार कर सकी।

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अलवर

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Umesh Sharma

Jun 08, 2026

uit alwar land

अलवर के सात कुओं की इस जमीन पर बसानी थी स्कीम

अलवर शहर में करीब 50 बीघा जमीन ऐसी है, जो 48 साल से खाली पड़ी है। इस बेशकीमती जमीन का मूल्य 750 करोड़ रुपए से अधिक आंका जा रहा है। यूआइटी इस जमीन पर कॉलोनी नहीं बसा पाई और न चार कॉलोनियों का विस्तार कर पाई। यूआइटी के अधिकारियों को खातेदारों के साथ बैठक करके मुआवजे का निर्धारण करना था और उसका प्रस्ताव सरकार को भेजकर मंजूर कराना था, लेकिन खातेदार विश्वास में नहीं लिए गए और मामला लंबित होता चला गया। शहर के विकास का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट नेताओं की नजरों से कई बार निकला। सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जानकारों का कहना है कि इस जमीन पर मुआवजे का निर्धारण या अन्य पेच नहीं निकाले गए, तो इस पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ेगा।


विजय नगर, बुद्ध विहार, स्कीम नंबर 10, स्कीम नंबर पांच पंचवटी कॉलोनी को बसाने के लिए सात कुओं (खारिया कुआं, रंगीला कुआं, बहड़ी वाला कुआं) की 160 हेक्टेयर से अधिक जमीन यूआइटी ने वर्ष 1978 में अधिग्रहित की थी। जमीन देने के लिए अधिकतर खातेदार तैयार हो गए थे, लेकिन करीब 110 खातेदारों ने असहमति जताई और वे हाईकोर्ट पहुंच गए। वहां से भी यही बात सामने आई कि खातेदारों का मुआवजा तय किया जाए। यदि खातेदार इस पर तैयार हो जाते हैं, तो रास्ता निकल जाएगा। इसके बाद यूआइटी ने बैठक की, लेकिन अब तक रास्ता नहीं निकला। यही कारण है कि करीब 50 बीघा से अधिक एरिया में जमीन खाली पड़ी है, जिससे इन कॉलोनियों का विस्तार नहीं हो पा रहा। ऐसे में बेशकीमती जमीन जनता के काम नहीं आ पा रही है।

चार हजार से ज्यादा आवास बनें, खाली जमीन पर बन सकेंगे 500 आवास

सात कुओं की जमीन पर चार कॉलोनियों में चार हजार से अधिक आवास बने हुए हैं। खाली करीब 50 बीघा जमीन का निस्तारण होगा, तो इस पर 500 से अधिक आवास बनाए जा सकेंगे। हालांकि यह ले-आउट पर निर्भर करेगा।

इन कॉलोनियों का मामला भी 28 साल से फंसा

यूआइटी रोहिणी, साकेत कॉलोनी बसाने के लिए भी वर्ष 1998 से प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ रही है, लेकिन 1200 बीघा जमीन पर मुआवजा तय नहीं किया गया। इसका प्रस्ताव सरकार को जरूर भेजा गया, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई। कुल मिलाकर एक बड़ी कॉलोनी राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में जमीन पर नहीं आई और न यह जमीन खातेदारों को दी गई। जमीन खाली पड़ी है। कानून के मुताबिक यह जमीन खातेदारों की हो गई, पर यूआइटी कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं।