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यूआईटी में टेंडर के नाम पर बड़ा खेल, बोली 25 लाख की, ठेका 15 लाख में 

यूआईटी में टेंडर के नाम पर बड़ा खेल हो गया। ट्रांसपोर्ट नगर में पार्किंग की बोली 25 लाख रुपए में लगी, लेकिन ठेका 15 लाख रुपए में छूटा।

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यूआईटी में टेंडर के नाम पर बड़ा खेल हो गया। ट्रांसपोर्ट नगर में पार्किंग की बोली 25 लाख रुपए में लगी, लेकिन ठेका 15 लाख रुपए में छूटा। सरकार को दस लाख रुपए का नुकसान हो गया। इस संबंध में यूआईटी के अफसरों पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लग रहा है। जिला कलक्टर ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।

यूआईटी ने 4 सितंबर को टेंडर की सूचना सार्वजनिक की थी। जिसमें ट्रांसपोर्ट नगर पार्ट-ए के 75600 वर्ग फीट एरिया को पार्किंग के लिए देना था। अमानत राशि तीन लाख रुपए तय की गई। निर्धारित सुरक्षा शुल्क 6 घंटे के लिए तय हुआ, जिसमें ट्रक की 40, बड़े ट्रक व ट्रोला की 60, लोडिंग व थ्री व्हीलर की 30 रुपए दरें तय की गईं। इसी तरह पार्ट-बी के ब्लॉक-ए के क्षेत्रफल 31 हजार वर्ग फीट एरिया के टेंडर के लिए अमानत राशि एक लाख रुपए तय की गई।

इसमें भी वाहनों की दरें पार्ट-ए के अनुसार ही रखी गईं। इसकी बोली 17 सितंबर को यूआईटी कार्यालय में लगाई गई। ए-पार्ट की पार्किंग की पहली बोली 25.11 लाख रुपए की थी और पार्ट-बी की उच्चतम बोली 22.81 लाख रुपए थी। पार्ट-ए में दूसरे नंबर की बोली 25 लाख की लगी। आरोप है कि पहली बोली लगाने वाले व्यक्ति ने यूआईटी को पूरा भुगतान नहीं किया। इसके बाद यूआईटी ने दोबारा नीलामी की तिथि 8 अक्टूबर तय कर दी। बताते हैं कि दूसरे नंबर पर रहे व्यक्ति ने यूआईटी से 25 लाख में नीलामी देने के लिए कहा। साथ ही 3 लाख व एक लाख की डीडी थी यूआईटी के नाम दी, लेकिन इंजीनियरों ने खेल कर दिया। उसे टेंडर न देकर 15 लाख की बोली लगाने वाले को टेंडर दे दिया।

यूआईटी सचिव ने कलक्टर को भेजी तथ्यात्मक रिपोर्ट

यूआईटी सचिव स्नेहल नाना ने कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला को भेजी तथ्यात्मक रिपोर्ट में कहा है कि शिकायतकर्ता व उनके साथ आए अन्य लोग यूआईटी परिसर में घूमते रहे, लेकिन अमानत राशि जान-बूझकर जमा नहीं करवाई। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन लोगों ने नीलामी के लिए डीडी जमा करवाने के लिए कहा, लेकिन तब तक नीलामी प्रक्रिया पूरी हो गई थी। शिकायत तथ्यों से परे है। इधर, इस संबंध में अधीक्षण अभियंता तैयब खान से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

यूआईटी सचिव ने कलक्टर को भेजी तथ्यात्मक रिपोर्ट

यूआईटी सचिव स्नेहल नाना ने कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला को भेजी तथ्यात्मक रिपोर्ट में कहा है कि शिकायतकर्ता व उनके साथ आए अन्य लोग यूआईटी परिसर में घूमते रहे, लेकिन अमानत राशि जान-बूझकर जमा नहीं करवाई। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन लोगों ने नीलामी के लिए डीडी जमा करवाने के लिए कहा, लेकिन तब तक नीलामी प्रक्रिया पूरी हो गई थी। शिकायत तथ्यों से परे है। इधर, इस संबंध में अधीक्षण अभियंता तैयब खान से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।