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सुबह खाली बर्तनों के साथ दौड़ फिर जलदाय कार्यालय पर प्रदर्शन

पेयजल संकट ने बदल दी अलवर शहर की दिनचर्य जलदाय विभाग अभी तक नहीं कर पाया है टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था
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अलवर

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Prem Pathak

Jun 02, 2019

water crises in alwar

सुबह खाली बर्तनों के साथ दौड़ फिर जलदाय कार्यालय पर प्रदर्शन

अलवर. आग उगलते सूरज ने अलवर शहर के चैन को छीन लिया है। सुबह की पहली किरण फूटते ही शहर के नर-नारी खाली बर्तनों के साथ इस नल से उस नल तक दौड़ लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन कुछ भाग्यशालियों को ही बर्तनों को भर कर घर वापसी का मौका मिलता है, शेष हाथों के खाली बर्तनों को बजाते हुए लटके हुए मुंह के साथ घरों का रुख कर लेते हैं। इसके बाद शहर के जलदाय कार्यालयों पर नारे गूंजने लगते हैं। कार्यालयों पर सिर्फ एक ही आवाज सुनाई देती है कि प्यासे कंठों को तर करने के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तो की जाए।

असल में गर्मी के चलते शहर का ज्यादातर हिस्सा पेयजल संकट से जूझ रहा है, इन क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन इस साल टैंकरों से पेयजल सप्लाई नहीं हो पाने से प्यासे लोग रोजाना सडक़ों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले में इन दिनों तापमान ४५ डिग्री के इर्द गिर्द रहने से अलवर शहर ही नहीं पूरे जिले में पानी की समस्या गहरा गई है। अलवर शहर में कई टयूबवैल सूख चुके हैं, कुछ में पानी का डिस्चार्ज कम हो गया है।

प्यास से जूझ रहे हैं शहर के ये क्षेत्र
जुबली बास, एरोड्रम रोड, अंडोला मोहल्ला, प्रतापनगर, भगवानपुरा, पहाडग़ंज हजूरी गेट, महताबसिंह का नौहारा, धोबी गट्टा, विकास पथ, मालन की गली, सिद्धिपुऱा, मोहल्ला दिल्ली दरवाजा, गंगा मंदिर बलजी राठौड़ की गली, शिकारी पाड़ा, बिराई माता मोहल्ला, राठ नगर, शिव कॉलोनी, शिवाजी पार्क, गालीब सैयद मोहल्ला, कल्लू पाड़ा, लोहिया पाड़ी, तिलक मार्केट, ढकपुररी, हकीमजी की गली, बांस वाली गली, नुक्ती का कुआं, भैरो का स्थान, बीरबल मोहल्ला, भीकम सैयद, धोबी पाड़ा, मीना की गली, खपटा पाड़ी, रंगभरियों की गली, चकला गूंदी, मोहन पंसारी की गली, सक्का पाड़ी, माता वाली गली जगन्नाथ मंदिर, हर बक्श का मोहल्ला, लादिया पहाड़ों में पवन मित्तल व गौरी विजय वाली सडक़, लादिया पहाड़ों में पई की गली, पारीकजी का चौक, राजू विजय वाली सडक़, गुर्जर पाड़ी, गुरुजी का मंदिर, अखैपुरा, हरिजन बस्ती, धीवर बस्ती, सूरसागर, चमेली बाग, ब्रह्मचारी मोहल्ला, गायवाला मोहल्ला, नवाबपुरा, ठाकरवाला कुआं, भैरू का चबूतरा, गुलाब बाग, रथखाना, राजाजी का बास, तंवर कॉलोनी, करोली कुण्ड, मेहंदी बाग, रामानंद नगर, हरदेव विहार, विवेकानंद नगर सेक्टर १,२,३,४ एवं मानसरोवर, कृषि भूमि पर बसी आबादी, शिवलाल पुरा, खदाना मोहल्ला, चाह पप्पू, केडलगंज, मरेठिया बास, कबीर कॉलोनी, लिसोडा वाला कुआ, इंदिरा कॉलोनी, अट्टा मंदिर रघुमार्ग, काला कुआं, नया बास, रामकुटीर कॉलोनी, नरूका कॉलोनी, मेहंदी बाग, मोती डूंगरी, दारूकूटा, बिलूची का कुआं, रत्ती का कुआं, सोनावा डूंगरी, मयूर विहार, भैरू बस्ती। शहर के इन क्षेत्रों को जलदाय विभाग ने संकटग्रस्त मान रखा है।

इसके अलावा भी अनेक मोहल्ले व कॉलोनियों में पानी की समस्या है।

जलदाय विभाग का कहना है कि इन क्षेत्रों में पानी की कमी का कारण नलकूपों में पानी की आवक कम होना, सिंगलफेज नलकूप का सूख जाना, उच्च जलाशय से सप्लाई के अंतिम छोर पर पानी नहीं पहुंचना, निजी स्रोत पर निर्भरता, नलकूपों से पानी की आवक कम होने से टंकियों के नहीं भर पाने से समस्या बढ़ गई है।

टैंकर सप्लाई ही निदान

जलदाय विभाग की नजर में पेयजल संकट ग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल सप्लाई ही एकमात्र समाधान है। इसके अलावा नए नलकूपों का निर्माण या पेयजल टंकियों में अतिरिक्त पानी लाना है। लेकिन इस साल टैंकरों से पानी की परिवहन व्यवस्था अब तक सुचारू नहीं हो पाई है।