
MP Kamalbhan Singh
अंबिकापुर. महिला बाल विकास विभाग द्वारा रविवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का टेंट पंडाल उखाड़ देने के बाद सोमवार को छतरी लेकर प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 21 दिनों से चल रहे हड़ताल को समाप्त कराने सोमवार को सासंद भी पहुंचे लेकिन प्रदर्शकारी कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने उनकी एक न सुनी और बिना लिखित आश्वासन के काम पर लौटने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे जनप्रतिनिधि जीराफूल चावल खा रहे हैं और हमें मोटा चावल खाने को कह रहे हैं।
पिछले 21 दिनों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मानदेय बढ़ाने व नियमितीकरण की मांग को लेकर जिले के लगभग 4000 आंगनबाड़ी केंद्रो को बंद कर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। रविवार को महिला बाल विकास अधिकारी निशा मिश्रा ने धरना स्थल पहुंच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का टेंट व पंडाल उखड़वा दिया था।
इसके बाद सभी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने खुले आसमान के नीचे छतरी लेकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था। सोमवार की सुबह 9 बजे से विभिन्न जगहों से आए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने खुले आसमान के नीचे छत्तरी लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए सोमवार को सासंद कमलभान सिंह भी धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंबा कहा कि वे शासन या प्रशासन की तरफ से नहीं आए हैं, उनके दुख-दर्द को जानने आए हैं।
उन्होंने काफी देर तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास किया लेकिन वे टस से मस नहीं हुईं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बिना लिखित आश्वासन मिले काम पर लौटने से साफ इनकार कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रुख को देखते हुए सांसद यह कहते हुए वापस लौट गए कि जब काम पर प्रदर्शनकारी वापस नहीं लौटेंगे तो वे मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री तक उनकी बात कैसे पहुंचाएंगे।
इस बीच कई कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस भी जनपद के सीईओ द्वारा जारी किया गया। इस दौरान उनके साथ भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंबिकेश केशरी, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष जन्मजेय मिश्रा, विधानंद मिश्रा, कैलाश मिश्रा, संतोष दास सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
मानसिक रूप से रहें तैयार, तब होगी बात
सासंद कमलभान सिंह ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कहा कि यह योजना केंद्र सरकार की है। इस संबंध में उनकी बातों को सीएम व पीएम तक पहुंचाएंगे। सरकार ने आपका सम्मान बढ़ाया है। पूर्व में आपकों साढ़े तीन सौ रुपए मानदेय मिलता था, अब ४ हजार रुपए मिलता है। इसके साथ ही सरकार ने १ हजार रुपए और बढ़ा दिया है।
आप सभी मानसिक रूप से काम करने को तैयार रहें। सरकार ने आपको मजबूत किया है। इसपर कार्यकर्ताओं ने कहा कि खाली पेट कैसे मानसिक रूप से मजबूत रहें । 4 हजार रुपए में परिवार कैसे चलेगा यह आप ही बताएं। इसपर भी सासंद ने कहा कि 4 हजार रुपए बहुत होता है। आप सभी काम पर लौट जाएं।
हमारे बच्चे कैसे करें पढ़ाई
आंगन बाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि आप सांसद हैं और आपको हमने चुना है। आपने हमारे दुख को देखा है। सासंदों का जब वेतन बढ़ाना होता है तो सभी हाथ खड़ा कर देते हैं लेकिन हम जो सुबह से शाम तक सरकार की विभिन्न योजनाओं पर काम करते हैं उन्हें सरकार व प्रशासन दबाने में जुटी हुई है।
आपके बेटे-बेटियां डाक्टर व इंजीनियर की पढ़ाई करें और हमारे बेटे-बेटियों को पढऩे का भी अधिकार नहीं है। हम ४ हजार रुपए में अपना घर चलाएं या अपने बच्चों को पढ़ाएं।
जिले को किया सुपोषित और खुद हैं कुपोषित
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरगुजा जिला का नाम सुपोषित जिले में आता है। सासंद द्वारा उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका मानदेय बढ़ा दिया जाए और नियमित कर दें। लेकिन किसी भी मांग पर सांसद से आश्वासन नहीं मिलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमने पूरे जिले को सुपोषित किया और आज खुद ही कुपोषित हैं।
उन्होंने सांसद को यहां तक कह दिया कि आज दमन करने वाले नेता खुद तो जीरा फूल चावल खा रहे हैं और हमे मोटा चावल खाने को कह रहे हैं। इसपर सासंद ने कहा कि एक व्यवस्था बनी हुई है, उसके तहत पूरा काम किया जा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई की दी धमकी
सांसद के बार-बार काम पर लौटने की बात कहे जाने पर भी जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं मानीं तो उन्होंने कहा कि अगर ४ हजार रुपए का महत्व नहीं होता तो इतनी महिलाएं यहां खड़ी नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब काम पर नहीं लौटेंगे तो बात करने का कोई फायदा नहीं है। चूंकि आप सभी सरकार के नियमित कर्मचारी नहीं है, प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती है।
Published on:
26 Mar 2018 09:14 pm
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