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Big land fraud: 6.25 एकड़ का रिंग बांध तालाब बचा मात्र 57 डिसमिल, एक ही व्यक्ति के 2 मृत्यु प्रमाण पत्र से करा दी रजिस्ट्री!

Big land fraud: दो-दो मृत्यु प्रमाण पत्र व मनगढ़ंत वंशवृक्ष से बढ़ा संदेह, सामाजिक कार्यकर्ता ने कलेक्टर से अतिक्रमण कर तालाब की जमीन बेचने वालों के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

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Big land fraud

Ring bandh pond (Photo- Patrika)

अंबिकापुर। नगर निगम क्षेत्र में तालाबों के घटते रकबे और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मास्टर प्लान 2021 में दर्ज जलाशयों की जमीन (Big land fraud) लगातार कम होने के आरोप सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने पूरे मामले को उजागर करते हुए कलेक्टर सरगुजा से हस्तक्षेप की मांग की है। रविवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कैलाश मिश्रा ने बताया कि रिंग बांध तालाब, जो पहले 6.25 एकड़ क्षेत्र में फैला था, अब सिमटकर मात्र 57 डिसमिल रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 2026 में शेष भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई और तालाब के बड़े हिस्से को रातों-रात पाट दिया गया।

कैलाश मिश्रा ने कहा कि तालाबों के जलभराव क्षेत्र में अवैध कब्जे (Big land fraud) किए जा रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासकीय रिकॉर्ड में हेरफेर कर संदिग्ध नामांतरण किए गए हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नामांतरण निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

दस्तावेजों के अनुसार, खसरा नंबर 3714 की भूमि, जो पहले किशुन बहादुर सिंह के नाम दर्ज थी, वर्ष 1982-83 में जयलाल के नाम कैसे दर्ज हुई, इसकी जांच नहीं की गई। इसके अलावा आवेदिका ननकी बाई पति बन्धुदास, ग्राम नावापारा सखौली, तहसील दरिमा द्वारा तहसीलदार न्यायालय अंबिकापुर में प्रस्तुत प्रकरण में जयलाल पिता बोधन के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र लगाया गया, जिसमें मृत्यु तिथि वर्ष 1976 और स्थान होलीक्रास अस्पताल अंबिकापुर दर्शाया गया है।

यह प्रमाण पत्र नगर निगम अंबिकापुर द्वारा 14 फरवरी 2018 को पंजीकृत (Big land fraud) किया गया। आवेदिका की मृत्यु हो जाने के कारण यह प्रकरण नश्तीबद्ध कर दिया गया।

एक व्यक्ति के दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र

ननकी बाई की मृत्यु के बाद पुन: तहसीलदार न्यायालय अंबिकापुर (Big land fraud) में एक अन्य प्रकरण में आवेदक चंद्रशेखर यादव, पिता स्व. जगतपाल यादव, दर्रीपारा द्वारा जयलाल पिता बोधन का एक और मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें मृत्यु तिथि 12 अप्रैल 1963 एवं स्थान अमलभिठ्ठी, लखनपुर दर्शाया गया है।

यह प्रमाण पत्र 62 वर्ष बाद, 1 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत अमलभिठ्ठी से पंजीकृत किया गया। एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग समय के मृत्यु प्रमाण पत्र सामने आने से पूरे मामले पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।

Big land fraud: मनगढ़ंत वंशवृक्ष का आरोप

कैलाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि जयलाल के नाम पर प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी है। पटवारी अमलभिठ्ठी, लखनपुर द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में तहसीलदार लखनपुर के वंशवृक्ष संबंधी पत्र में दिनांक अंकित नहीं है। साथ ही पत्र क्रमांक 1102 दिनांक 16 अक्टूबर 2025 भी प्रकरण (Big land fraud) में उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त दस्तावेजों के फौती नामांतरण किया जाना पूरी तरह गलत है। पटवारी दिनेश भगत पर मनगढ़ंत वंशवृक्ष तैयार करने का आरोप लगाया गया है। ननकी बाई द्वारा प्रस्तुत वंशवृक्ष को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि दूसरे प्रकरण में अलग वंशवृक्ष के आधार पर नामांतरण किया गया।

तालाबों के संरक्षण की मांग

मिश्रा ने मांग की है कि संदिग्ध नामांतरण तत्काल निरस्त (Big land fraud) किया जाए और रिंग बांध सहित अन्य तालाबों के जलभराव क्षेत्र को पुनर्जीवित कर संरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शहर के जल स्रोत समाप्त होने का खतरा है।

इस तरह सामने आया मामला

रिंग बांध तालाब (Big land fraud) प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित है, जो निस्तार और जल बहाव क्षेत्र के रूप में उपयोग में रहा है। कुछ दिन पहले आजाद इराकी नामक व्यक्ति द्वारा 20-25 जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से रातों-रात तालाब को पाटा जा रहा था। सूचना मिलने पर नगर निगम और जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर कार्य रुकवाया। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि उक्त भूमि आजाद इराकी के नाम पर कैसे दर्ज हुई। मामले में कार्रवाई की तैयारी जारी है।

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