
Villagers body in forest
अंबिकापुर/धरमपुर. प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत धरमपुर जंगल से लगे अपने गन्ने की फसल देखकर रिटायर्ड लाइनमैन रविवार की शाम बाइक से लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में 2 हाथियों से उसका सामना हो गया। हाथियों ने बाइक गिरा दी तो वह जान बचाने खेत में भागने लगा।
लेकिन हाथियों ने उसे दौड़ाकर सूंड में लपेट लिया और कुचल-कुचल कर मार डाला। हाथियों ने उसकी लाश के कई टुकड़े कर दिए। सूचना पर वन विभाग के अधिकारी पहुंचे और पंचनामा पश्चात शव का पीएम कराया। उन्होंने मृतक के परिजनों को 25 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि भी प्रदान की। हाथियों से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धरमपुर निवासी जुठेल दास 65 वर्ष रिटायर्ड लाइनमैन था। रविवार की शाम करीब 5 बजे वह ग्राम गौरा स्थित अपने खेत में गन्ने की फसल देखने गया था। वहां से 6.30 बजे वह बाइक से घर लौट रहा था।
रास्ते में ग्राम भरदा चौक के पास अचानक उसका दो हाथियों से सामना हो गया। हाथियों ने पहले सूंड से धक्का देकर बाइक को गिरा दिया। इससे लाइनमैन अपनी जान बचाने खेत से होते हुए भागने लगा। 100 मीटर तक ही वह भाग पाया होगा कि हाथियों ने उसे दौड़ाकर सूंड में लपेट लिया।
इसके बाद उसे जमीन पर पटक कर कुचल डाला। हाथियों ने कई बार उसे फुटबॉल की तरह हवा में उछाला। पैरों तले रौंदे जाने से उसकी लाश कई टुकड़ों में बंट गई। लाइनमैन को मार डालने के बाद हाथी धरमपुर जंगल में चले गए। इधर आवाज सुनकर आस-पास के ग्रामीण पहुंचे और इसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा लेकिन अंधेरा हो जाने के कारण वे भी कुछ न कर सके।
सुबह एसडीओ सुधाकर खलखो व रेंजर अनिल सिंह मौके पर पहुंचे और पंचनामा पश्चात मौके पर ही शव का पीएम कराया। उन्होंने मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 25 हजार रुपए प्रदान किए।
15 हाथी पार कर चुके थे सड़क
प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में करीब 40 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इनमें से धरमपुर इलाके में 17 हाथियों का दल है। बताया जा रहा है कि मृतक के लौटते समय दल के 15 हाथी रोड पार कर चुके थे लेकिन 2 हाथी पीछे चल रहे थे। इसी बीच वह हाथियों के चपेट में आ गया था। फिलहाल हाथियों का यह दल धरमपुर जंगल में ही डटा हुआ है।
दर्जनभर लोगों को उतार चुके है मौत के घाट
बताया जा रहा है कि इस वर्ष अब तक प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथी दर्जनभर लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं। वहीं सैकड़ों एकड़ धान, मक्के व गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने के अलावा 200 से अधिक घरों को तोड़ चुके हैं। दिवाली से पूर्व भी 2 हाथियों ने सोनगरा जंगल में खुखड़ी उखाडऩे गए एक वृद्ध की जान ले ली थी।
हाथियों के तांडव से त्रस्त हैं ग्रामीण, विभाग भी असहाय
हाथियों के तांडव से त्रस्त ग्रामीण कई बार वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी कर चुके हैं। इधर हाथियों के आगे वन विभाग भी अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है। विभाग उन्हें रोकने के कई उपाय भी कर चुका है लेकिन अब तक कोई भी पहल कारगर साबित नहीं हुई है।
जागरुकता की भी है कमी
क्षेत्र में हाथियों के होने की जानकारी वन विभाग सहित ग्रामीणों को भी है। विभाग द्वारा ग्रामीणों को कई बार समझाइश दी जा चुकी है कि वे जंगल में न लकड़ी लेने जाएं और न खुखड़ी उखाडऩे। उन्होंने हाथियों को न छेडऩे की भी सलाह ग्रामीणाों को दी है। इसके बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर ऐसा करते हैं।
Updated on:
23 Oct 2017 08:49 pm
Published on:
23 Oct 2017 02:44 pm
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