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परसा कोल खदान के विरोध में उतरे ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में लगे जनरेटर और अस्थायी चेक पोस्ट में लगाई आग

Coal mines Protest: ग्राम साल्ही में खदान का विरोध करने वाले ग्रामीणों ने मचाया उत्पात, ग्रामीणों का कहना कि फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव दिखाकर कोल खदान (Coal Mine) खोलने की दे दी गई स्वीकृति, जबकि 3 गांवों के लोगों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन (Protest) करते हुए डेढ़ महीने से की जा रही है हड़ताल

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Protest by villagers

Fire in check post

उदयपुर. Coal mines Protest: सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित परसा कोल खदान के विरोध में ग्रामीणों का विरोध शुक्रवार को खुलकर सामने आया है। ग्रामीणों की उग्र भीड़ (Angry Villagers) ने खदान के चल रहे निर्माण कार्य को बंद करा दिया। बड़ी संख्या में खदान के विरोध में पहुंचे लोगों ने कार्यस्थल पर लगे जनरेटर को फूंक दिया तथा वहां बनाए गए अस्थायी पोस्ट (Temperory post) में भी आग लगा दी। आगजनी की घटना के बाद वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस व प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाइश देने में लगा है।


गौरतलब है कि परसा कोल खदान (Parsa Coal Mines) को एक तरफ जहां शासन द्वारा यह कहते हुए स्वीकृति दे दी गई है कि कोल खदान खोलने को लेकर लोग समर्थन कर रहे हैं। जबकि इसका विरोध फतेहपुर, हरिहरपुर व अन्य गांव के ग्रामीणों द्वारा लगातार किया जा रहा है।

इसी तारतम्य में ग्रामीणों द्वारा 2 मार्च से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन ग्राम हरिहरपुर में किया जा रहा है। इसी बीच शुक्रवार को खदान का विरोध कर रहे ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने कार्यस्थल में लगे कंपनी के जनरेटर व मजदूरों के अस्थायी टिन शेड से बने निवास को आग के हवाले कर दिया। इससे वहां तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।

IMAGE CREDIT: Villagers protest of coal mine

खदान में आगजनी की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, डिप्टी कलेक्टर अनिकेत साहू, थाना प्रभारी लखनपुर प्रशिक्षु आईपीएस रॉबिंसन गुडिय़ा, धीरेंद्र नाथ दुबे, उदयपुर थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। आगजनी से कम्पनी को कितने का नुकसान हुआ है, यह अभी पता नहीं चल पाया है।

IMAGE CREDIT: Coal mines protest

फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव का आरोप
विरोध कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव (fake gram sabha proposal) से स्वीकृत कोयला खदान के विरोध में कई बार शासन-प्रशासन को आवेदन दिया गया।

यह भी पढ़ें: कोल कंपनी अपने कर्मचारियों को 50-60 हजार जबकि गांव के कर्मियों को मात्र 15 से 22 हजार देती है वेतन, किया प्रदर्शन

लेकिन इस पर अब तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई। शासन ने भी इस आधार पर कोल खदान (Coal mines) खोलने की स्वीकृति दे दी जो सरासर गलत है।


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