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शाम ढलते ही गांव की ओर आते हैं ये विशाल जानवर, इसलिए मशाल जलाकर पूरी रात करते है परिवार की सुरक्षा

1 सप्ताह से उदयपुर वन परिक्षेत्र में है इन जानवरों का आतंक, 30 एकड़ से अधिक भूमि में लगी फसल को कर चुके हैं बर्बाद
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अंबिकापुर

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Ram Prawesh Vishwakarma

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Updated: 1 Oct 2018, 3:21 PM IST

Villagers with mashaal

Villagers burning mashaal

अंबिकापुर. उदयपुर वन परिक्षेत्र इन दिनों गज आतंक से थर्राया हुआ है। जहां वन विभाग इस क्षेत्र को हाथी विचरण क्षेत्र नहीं मानते हुए उत्खनन की अनुमति देने की अनुशंसा करता आया है। वहीं इस क्षेत्र के ग्रामीण पिछले काफी दिनों से हाथियों के आतंक से रतजगा करने को मजबूर है।

एक सप्ताह से हाथियों के भय से महेशपुर सहित आसपास के कई गांव के ग्रामीण परिवार सहित मशाल लेकर हाथियों से बचने के लिए रातभर इधर-उधर भटक रहे हैं। दिन में ग्रामीण अपनी नींद पूरी करते हैं और काम-धंधा निपटाते हैं।


अविभाजित सरगुजा हाथियों के आतंक से थर्राया हुआ है। उदयपुर वन परिक्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से 11 हाथियों का दल उत्पात मचा रहा है। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण व आठवीं शताब्दी के अवशेष ग्राम महेशपुर में बिखरे पड़े हैं। ऐसे में जहां हाथियों के दल से बचाव के लिए ग्रामीण पूरी रात रतजगा करने को मजबूर हैं।

वहीं जगह-जगह बिखरे पड़े प्राचीन अवशेषों के भी हाथियों के उत्पात से क्षतिग्रस्त होने की संभावना लोगों द्वारा जताई जा रही है। शनिवार की रात हाथियों के दल ने मोहनपुर उपकापारा में मंगलू के घर को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। हाथी शाम को 5 बजे के बाद बस्ती में घुसकर जहां घरों को तोड़ रहे हैं, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दे रहे हैं।

हाथियों के दल ने एक सप्ताह के अंतराल में लगभग 30 एकड़ से अधिक भूखण्ड में लगी फसल को नष्ट कर दिया है। फसल को बर्बाद करने के बाद हाथियों का दल महेशपुर के जंगल में डटा हुआ है। दिनभर घने जंगलों के बीच आराम करने के बाद शाम होते ही हाथियों का दल जंगल से बाहर निकलकर बस्तियों में प्रवेश कर जाता है।

इससे ग्रामीणों में भय का वातावरण बना हुआ है। हाथियों के डर से लोग रतजगा करने को मजबूर हैं। हाथियों की वजह से ग्रामीणों का खेती कार्य भी प्रभावित हो रहा है। लेकिन अभी तक वन विभाग द्वारा कोई खास पहल राहत दिलाने के लिए नहीं की जा रही है।


हाथियों के डर से आधा दर्जन गांव के ग्रामीण कर रहे हैं रतजगा
महेशपुर, मानपुर, जगरनाथपुर, लक्ष्मण, रामनगर सहित अन्य गांव के ग्रामीण हाथियों के डर से रतजगा करने को मजबूर हैंं। हाथियों को बस्तियों से दूर रखने के लिए ग्रामीण मशाल जलाकर परिवार सहित रतजगा कर रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों के साथ युवा, महिला व बच्चे हाथों में मशाल पकड़े दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण हाथियों को भगाने के लिए पटाखा, मशाल व टॉर्च का भी सहारा ले रहे हैं।


वन विभाग करा रहा बेरिकेडिंग
हाथियों को गांव की ओर आने से रोकने के लिए वन विभाग द्वारा बेरिकेडिंग की जा रही है। हाथियों को दूर रखने के लिए लाउडस्पीकर से हाथियों के रूट के बारे में ग्रामीणों को सचेत किया जा रहा है। उन्हें हाथियों के पास नहीं जाने की समझाइश दी जा रही है।

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