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Video: शराबबंदी पर मंत्री अमरजीत बोले- भाजपाई पहले शपथ पत्र दें कि हम न शराब पीते हैं न पीने का समर्थन करते हैं

Liquor ban: शादी कार्यक्रम में अपने गृहग्राम पहुंचे प्रदेश के खाद्य एवं संस्कृति मंत्री से प्रदेश में शराब बंदी को लेकर किया गया था सवाल, आरक्षण को लेकर ये बोले मंत्री

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Liquor ban

Chhattisgarh food minister Amarjeet Bhagat

अंबिकापुर. Liquor ban: प्रदेश के खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत का शराबबंदी को लेकर एक बयान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे बोलते दिख रहे हैं कि पहले भाजपाई एक शपथ पत्र दें कि वे शराब नहीं पीते हैं और न ही पीने का समर्थन करते हैं। दरअसल खाद्य मंत्री बुधवार को अपने गृहग्राम पार्वतीपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उनसे छत्तीसगढ़ में भाजपाइयों द्वारा लगातार शराबबंदी की मांग को लेकर सवाल किए गए थे।


शराबबंदी के सवाल पर खाद्य मंत्री ने कहा कि भाजपा वाले पहले शराब पीना छोड़ें। वे एफिडेविड या सेल्फ डिक्लीयरेशन लेटर दें कि वे शराब नहीं पीते हैं और न ही शराब पीने का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपाइयों के यहां आयोजित पार्टियों में जाकर देखो, नाम नहीं लूंगा।

गुजरात में क्या हो रहा है, बिहार में क्या हो रहा है, वहां शराब बंद है फिर भी उपलब्ध है। भारतीय जनता पार्टी पहले उस जगह पर जाकर देखें जहां से उनके प्रधानमंत्री आते हैं, फिर आगे की बात करेंगे।

लोग पीना छोड़ दें तो बंद हो जाएगा
खाद्य मंत्री से जब यह सवाल किया गया कि प्रदेश की जनता भी लगातार सवाल पूछ रही है कि घोषणा पत्र में लिखे होने के बावजूद शराब क्यों बंद नहीं हो रही है। इस पर उन्होंने कहा कि यह सामाजिक चेतना की बात है। लोग खुद से पीना छोड़ दें, इसके बाद शराब बंद करने वाले कमेटी के पास ये बात हम भेज देंगे।

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आरक्षण को लेकर भाजपा पर कसा तंज
खाद्य मंत्री ने आरक्षण को लेकर भी भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भाजपा शुरु से ही आरक्षण का विरोधी रही है। हाईकोर्ट में जब आरक्षण के खिलाफ फैसला आया था तो भाजपाइयों की बांछें खिल गई थीं। वे खुलकर बयानबाजी, रैली, सभा सहित तमाम प्रपंच किया, लेकिन जैसे ही सीएम ने घोषणा की कि हम विशेष सत्र बुलाएंगे तो विरोध के स्वर बोलने लगे।

चाहे रमन सिंह हों या बृजमोहन। इधर सीएम ने विशेष सत्र बुलाकर इसे पारित कराया। सीएम ने कहा था कि हम हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति के 32 प्रतिशत आरक्षण के साथ खड़े हैं। यदि हमें सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े तो जाएंगे और उन्होंने वह किया। उन्होंने आरक्षण बिल भी लाया।

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विधानसभा में बिल पारित होने के बाद भाजपा के नेता (BJP leaders) ऐसे नदारद हुए जैसे कुछ था ही नहीं। इसके बाद इन्होंने पिछले दरवाजे से राज्यपाल के हाथों इसे रुकवाया। फिर जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, उस दिन से भाजपा में इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई। उन्होंने 2 कहावतों के साथ भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इनका आवरण उठ चुका है।