
Guddu soni
अंबिकापुर. जिस मां का हाथ पकड़कर चलना सीखा, उसी मां की सेवा भाव की प्रेरणा ने सत्तीपारा निवासी गुड्डू सोनी को अपना देहदान करने की सीख दी। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उसने मेडिकल कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए अपना शरीर दान करने हेतु फार्म मेडिकल कॉलेज में जमा कर लोगों के लिए मिसाल पेश की है। गुड्डू आर्थिक रूप से कमजोर है। फिलहाल वह ठेले पर सामान बेचकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है।
समाज की प्रति जिस तरह चिकित्सक की जवाबदेही होती है, उसी तरह समाज की भी यह जिम्मेदारी होती है कि वह एक अच्छा चिकित्सक बनने में विद्यार्थियों का सहयोग करे। चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव की शारीरिक रचना जानना एक एमबीबीएस स्टूडेंटस के लिए जानना जरूरी होता है।
मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के एनाटॉमी डिपार्टमेंट से मृत्यु उपरांत देह दान के लिए अब तक ८ फॉर्म लोगों द्वारा निकाला जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद महज 4 लोगों ने आवेदन जमा किया है। इसमें सत्तीपारा निवासी गुड्डु सोनी पिता छट्टू सोनी जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं और बीमार रहते हैं।
उन्होंने भी मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए फार्म जमा कर इस सभ्य समाज के लिए एक मिसाल पेश की है। चूंकि उनका विवाह नहीं हुआ है, इसलिए अपनी भतीजी पूजा सोनी को मृत्यु उपरांत देह सांैपने के लिए जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी सूचना उसने अपने परिजन को भी दी है।
गुड्डू का कहना है कि मां ने ही उसे लोगों की सेवा करने की सीख दी थी। हालांकि मां दुनिया को छोड़ चुकी है लेकिन उनके जेहन में आज भी वे बातें ताजा हैं। गुड्डू ठेला पर सामान बेचकर अपना जीवन-यापन करता है।
देहदान के पूर्व ये प्रक्रिया करनी होती है पूरी
मृत्यु उपरांत शव का पंचनामा, पुलिस का एनओसी, मृत्यु प्रमाण पत्र, परिजन का अनापत्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही मृत्यु उपरांत परिजन मेडिकल कॉलेज को जानकारी सौंपेंगे। अगर कोई देहदानकर्ता अस्पताल में भर्ती है तो वहां का कन्सलटेंट लेटर से काम हो जाता है। इसके लिए कोई अलग से औपचारिकता पूरी नहीं करनी होती है। दुर्घटना में मृत लोगों की बॉडी नहीं ली जाती है।
जागरूकता का है अभाव
एनाटॉमी विभाग को प्रत्येक 10 विद्यार्थियों पर एक शव की जरूरत होती है। ताकि विद्यार्थियों का अच्छी तरह से शारीरिक रचना की जानकारी दी जा सके। लेकिन अंबिकापुर में मेडिकल कॉलेज खुले अभी ज्यादा दिन नहीं हुआ है। इसकी वजह से लोगों में देहदान को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं है।
मेडिकल कॉलेज द्वारा देहदान के लिए जल्द ही जागरूकता अभियान चलायेगा। बिलासपुर में अब तक देहदान के लिए 400 से अधिक लोग फार्म जमा कर चुके हैं। जागरूकता के लिए सिर्फ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ही नहीं बल्कि अच्छे चिकित्सक के लिए समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
परिवर्तन के साथ नए शव की पड़ती है जरूरत
समाज में बदलाव प्रतिदिन देखा जाता है। इसके साथ ही जलवायु में परिवर्तन के साथ ही मानव शरीर की रचना में भी बदलाव देखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी होता है कि बदलते समय के अनुसार शव मिले, ताकि बेहतर शिक्षा दी जा सके।
बस एक फार्म भरना होता है
जागरूकता के अभाव की वजह से अभी लोग देहदान करने सामने नहीं आ रहे हैं। गुड्डू सोनी ने फार्म जमा कर समाज के लिए एक मिसाल पेश की है। मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग द्वारा देहदान के लिए अस्पताल अधीक्षक के कार्यालय में फार्म रखा हुआ है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में कोई भी आकर फार्म जमा कर सकता है। उसे विभाग द्वारा पूरी जानकारी दी जाएगी।
डॉ. रंजना सिंह आर्य, एचओडी, एनाटॉमी विभाग मेडिकल कॉलेज
Published on:
26 Apr 2018 04:01 pm
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