5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सूर्य के चारों ओर बना ‘हालो’, नजारा देख अचंभित हुए लोग, जानिए क्या कहते हैं भूगोल के विशेषज्ञ

Halo around the sun: सरगुजा जिले में आज दोपहर करीब 12 बजे सूर्य (Sun) के चारों ओर बनी वलयाकार आकृति, लोगों के बीच बना रहा चर्चा का विषय

2 min read
Google source verification
Halo

Halo around the Sun

अंबिकापुर.सरगुजा जिले में सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे आसमान में एक अनोखा (Unique) नजारा देखा गया। इस दौरान सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति काफी देर तक बनी रही। जिस किसी ने भी इसे देखा वह अचंभित रह गया। लोगों का मन यह जानने को उत्सुक था कि आखिर ये क्या है? ऐसा क्यों होता है?

इस संबंध में राजीव गांधी पीजी कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल सिन्हा ने बताया कि यह सूर्य का आभामंडल है, जिसे अंग्रेजी में 'हालो' (Halo) कहते हैं। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है। इसका धार्मिक रूप से कोई लेना-देना नहीं है।

Read More: Solar Eclipse 2020: कल होगी अद्भूत खगोलीय घटना, सदी के दूसरे सबसे लंबे सूर्य ग्रहण में कुछ पल के लिए छा जाएगा अंधेरा

प्रो. डॉ. अनिल सिन्हा ने बताया कि सूर्य के चारों बनी वलयाकार आकृति उसका आभामंडल है। चूंकि सूर्य सबसे शक्तिशाली (Powereful) है, इस कारण इतनी चमकदार आकृति बनी। यह आकृति कभी-कभार चंद्रमा के चारों ओर भी बनती है लेकिन वह उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती।

उन्होंने बताया कि बादलों के प्रकार में से एक 'पक्षाभ मेघ' (Cirrus) जब वायुमंडल में होता है तो उसमें बर्फ के कण होते हैं, (वैसे तो हर मेघ में बर्फ के कण होते हैं) उसमें प्रकाश का स्पेक्ट्रम बनता है, इस कारण ही हमें यह दिखाई देता है। ऐसा हमेशा नहीं बल्कि कभी-कभार होता है।

IMAGE CREDIT: Halo in Ambikapur

वर्षा की प्रकृति यह है कि जब बारिश का पानी वाष्प बनकर ऊपर जाता है और बादल बनता है। बादल में जो बर्फ (Snow) के कण बनते हैं और काफी देर तक रह जाते है, यदि बर्फ के ये कण दिन में काफी देर तक रुक जाते हैं तो ऐसी आकृति दिखाई देती है।

Read More: अद्भुत दृश्य: आसमान में दिखा Halo Space


लॉकडाउन या प्रदूषण से संबंध नहीं
डॉ. सिन्हा ने बताया कि इसका कोरोना, फिलहाल की स्थिति या प्रदूषण से कोई संबंध नहीं है। आसमान में प्रदूषण (Pollution) की मात्रा फिलहाल कम है, इस कारण आज यह स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि जब वायुमंडल की परिस्थितियां बदलती हैं तब ही यह दिखाई देता है।

वायुमंडल के बदलने पर ही यह निर्भर करता है। सूर्य का आभा मंडल बनना कोई बड़ी बात नहीं है, यह ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, जिसमें जितना ज्यादा ऊर्जा होता है, उसका आभामंडल उतना ही ज्यादा बनता है।