
Neem leaves
अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के गांवों में हरेली पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार 13 अगस्त को यह पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन किसानों के लिए खास होता है। इस दिन हल, फाल, कुदाल समेत अन्य कृषि उपकरणों की विधि-विधान से पूजा की जाती है तथा नाच-गाकर त्यौहार मनाया जाता है। गेड़ी नाच की भी परंपरा है। इस विशेष दिन पर घर-घर नीम की पत्तियां लगाई जाती हैं ताकि किसी बुरी शक्ति की नजर उनके परिवार पर न पड़े।
हरेली पर्व या हरियाली त्यौहार किसानों के लिए बड़ा खास मायने रखता है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, मुंगेली समेत अन्य जिलों में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। धान की रोपाई खत्म होने के बाद किसान कृषि उपकरणों की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा से पहले कृषि उपकरणों की साफ-सफाई व धुलाई की जाती है।
इसके बाद गांव में एक जगह उसे रखकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान वे खेत में अच्छी फसल हो, इसके लिए भगवान से कामना करते हैं। इस पर्व को मनाने किसान व उनके परिवार की महिलाएं, युवतियां व बच्चे एकजुट होकर नाच-गाना भी करते हैं। यह परपंरा छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मनाई जाती है।
गेड़ी नाच की परंपरा
हरेली पर्व पर कई इलाकों में गेड़ी नाच की परंपरा है। इसमें दो डंडों के निचले हिस्से में प्लस आकार की छोटी लकड़ी बांधी जाती है। इसके बाद उसे पैरों की अंगुलियों में फंसाकर उसी के सहारे चलते हुए डांस करते हैं। कोरिया जिले के कुछ गांवों में गेड़ी नाच देखने को मिलता है।
नीम की पत्तियों का टोटका
गांवों में हरेली पर्व के दिन किसानों द्वारा घर के छप्परों पर नीम की पत्तियां रखी जाती हैं। इसके पीछे ग्रामीणों की मान्यता है कि नीम की पत्तियां रखने से उनके परिवार पर बुरी शक्तियों का साया नहीं पड़ता है। ग्रामीण इसे टोटका के रूम में अपनाते हैं। वर्षों से यह परंपरा भी चली आ रही है।
Published on:
13 Aug 2018 05:06 pm
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