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Ambikapur News: प्रियांशी दुल्हन और जेल से रिहा संदीप बना दूल्हा, शादी के बाद गोद में मासूम बेटी के साथ हुई विदाई

Ambikapur marriage news: एमएसएसव्हीपी शक्ति सदन की संचालिका डॉ. मीरा शुक्ला ने किया 33वां कन्यादान, विदाई के दौरान छलक पड़े आंसू, तीन साल तक बालिका गृह में रही प्रियांशी, नन्हीं बेटी के साथ करेगी नए जीवन की शुरुआत
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Priyanshi and Sandeep Marriage in Ambikapur

Ambikapur news, शादी के दौरान प्रियांशी व संदीप, गोद में बच्ची के साथ हुई विदाई (Photo- Patrika)

अंबिकापुर। महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में मानवीय सेवा की मिसाल पेश कर रहीं एमएसएसवीपी शक्ति सदन की संचालिका डॉ. मीरा शुक्ला ने एक बार फिर संवेदनशील पहल करते हुए एक युवती का घर बसाने में अहम भूमिका निभाई। 16 अक्टूबर को शक्ति सदन परिसर में प्रियांशी राजवाड़े और संदीप चौधरी का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। डॉ. शुक्ला ने अपना 33वां कन्यादान (Kanyadan) कर नव दंपती को नए जीवन की शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया। इससे पहले वे 32 असहाय युवतियों के विवाह और पुनर्वास में सहयोग कर चुकी हैं।

बता दें कि प्रियांशी और संदीप का संबंध (Love affair) करीब 3 साल पहले शुरू हुआ था। उस समय प्रियांशी नाबालिग थी। इस दौरान उसने एक बच्ची को जन्म दिया था। नाबालिग से जुड़े मामले में संदीप के खिलाफ कार्रवाई हुई और उसे करीब 4-5 महीने जेल में रहना पड़ा। वहीं नियमानुसार प्रियांशी को बालिका गृह में संरक्षण दिया गया, जहां वह लंबे समय तक रही।

इस दौरान परिजनों ने भी उससे दूरी बना ली। प्रियांशी संदीप के साथ जीवन बिताने के फैसले पर अडिग रही। न्यायालय में सुनवाई के दौरान उसने अपनी इच्छा स्पष्ट की। इसके बाद संदीप जेल से रिहा (Release from Jail) हुआ। विवाह की कानूनी प्रक्रिया में समय लगने की जानकारी मिलने पर वह एमएसएसवीपी शक्ति सदन पहुंचा। बालिग होने के बाद प्रियांशी भी पिछले कई महीनों से यहीं रह रही थी।

Unique marriage: डॉ. शुक्ला की पहल से पूरी हुईं औपचारिकताएं

संदीप की स्थिति और बच्ची के भविष्य को देखते हुए डॉ. मीरा शुक्ला ने दोनों की शादी (Marriage) कराने की पहल की। संस्था की ओर से आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कराने की प्रक्रिया में सहयोग किया गया। इसके बाद दोनों का विवाह संपन्न हुआ। विवाह के बाद विदाई का दृश्य भावुक कर देने वाला रहा।

प्रियांशी की नन्हीं बेटी ने बालिका गृह और शक्ति सदन में लंबे समय तक महिला कर्मचारियों के स्नेह और देखभाल के बीच समय बिताया था। डॉ. मीरा शुक्ला ने भी प्रियांशी को गले लगाकर विदाई दी। उन्होंने कहा कि बच्ची से अलग होने का दुख जरूर है, लेकिन इस बात की खुशी और तसल्ली भी है कि अब उसे अपने माता-पिता के साथ परिवार का सहारा मिलेगा।

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