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Breaking : शिक्षकों को यकीन था करेगा CG टॉप, आया 5वां स्थान, जानिए क्या बनना चाहता है रोशन

शिक्षाकर्मी के बेटे रोशन ने 10वीं में हासिल किया 5वां स्थान, सरस्वती शिशु मंदिर का है छात्र, बधाई देने वालों का लगा तांता
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अंबिकापुर

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Ram Prawesh Vishwakarma

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Updated: 9 May 2018, 2:37 PM IST

Roshan with parents

Roshan Tiwari

अंबिकापुर. माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल के रोशन तिवारी ने 5वां स्थान हासिल किया। रोशन के पिता अरविंद तिवारी कल्याणपुर के प्राइमरी स्कूल में शिक्षाकर्मी के रूप में पदस्थ हैं जबकि मां सुषमा तिवारी गृहिणी हैं। पत्रिका से चर्चा के दौरान रोशन ने बताया कि वह मेरिट में स्थान पाकर काफी खुश है।

आगे चलकर वह मैथ्स से आईआईटी कर इंजीनियर बनना चाहता है। इस उपलब्धि से खुश उसके शिक्षकों का कहना है कि उन्हें यकीन था कि रोशन छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल करेगा लेकिन मेरिट में जगह बनाने को लेकर वे खुश हैं। रोशन ने यह उपलब्धि हासिल कर अविभाजित सरगुजा का नाम रौशन किया है।

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अंबिकापुर के गोधनपुर निवासी रोशन तिवारी शुरु से ही पढ़ाई सहित अन्य विधाओं में मेधावी रहा है। रोशन दो भाई-बहनों में छोटा है। पिता के शिक्षक होने की वजह से शुरु से ही पढ़ाई में उसकी काफी रुचि रही। रिजल्ट जारी होने के बाद जैसे ही रोशन के मेरिट में स्थान बनाने की सूचना उसके माता-पिता को मिली, वे खुशी से उछल पड़े। उन्होंने बेटे को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।

रोशन ने भी अपने माता-पिता व बड़ी बहन के पैर छुकर आशीर्वाद लिए। रोशन आगे चलकर आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता है। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों को दिया है।

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इस संबंध में रोशन की क्लास टीचर मीरा साहू ने बताया कि रोशन पढ़ाई के अलावा सभी एक्टिविटी में हिस्सा लेता था। उसमें भी वह हमेशा पहले से लेकर तीसरे स्थान पर ही रहता था। वह खेलकूद, भाषण, गीत-संगीत सहित अन्य एक्टिविटी में भी पीछे नहीं रहा।


सफलता का दिया मूलमंत्र
रोशन ने अपनी सफलता के पीछे की जो कहानी बताई है उसे जानकर दूसरे छात्रों को भी पे्ररणा मिलेगी। रोशन ने बताया कि उसकी सफलता का मूलमंत्र यह है कि 'पढ़ो ज्यादा, लिखो कम और समझो सबसे ज्यादा'।


शिक्षकों ने दी बधाई
मेरिट में स्थान बनाने वाला रोशन को शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा हुआ है। घर से निकलने के बाद रोशन अपने माता-पिता के साथ स्कूल पहुंचा। यहां प्राचार्य, शिक्षकों सहित छात्र-छात्राओं ने इस उपलब्धि के लिए उसे बधाई दी। शिक्षकों का कहना है कि 5वीं से लेकर 9वीं कक्षा तक वह काफी अच्छे अंकों से पास हुआ है।