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सीएम केजरीवाल ने जिस ट्रैफिक हवलदार को दी थी शाबासी, उसने मांगा वीआरएस, कहा- अधिकारी कर रहे प्रताडि़त

Delhi CM Kejriwal: ऑटो चालक पर यातायात नियमों के तहत कार्रवाई करने पर विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रताडि़त करने का लगाया आरोप, कहा- ऑटो संघ के दबाव में अधिकारी कर रहे ऐसा, एसपी ऑफिस में वीआरएस का दिया आवेदन, 12 साल बची है नौकरी

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Traffic police

Traffic head constable Devnarayan Netam

अंबिकापुर. Delhi CM Kejriwal: कोरोना काल में दूसरे राज्यों से घर जा रहे मजदूरों की अंबिकापुर के एक ट्रैफिक जवान ने काफी मदद की थी, उसने मजदूरों को अपने पैसे से खाना खिलाने के साथ ही सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया था। ट्रैफिक जवान के इस काम की सराहना पुलिस विभाग तो कर ही रहा था, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी फोन कर उसे शाबासी दी थी। मुस्तैदी व ईमानदारी से शहर के चौक-चौराहों पर ड्यूटी करने वाले ट्रैफिक जवान को अब विभाग के अधिकारी ही प्रताडि़त कर रहे हैं। इस संबंध में जवान का कहना है कि यातायात नियम तोडऩे पर उसने 3 दिन पहले एक ऑटो चालक पर जुर्माना लगाया था। अब ऑटो संघ के दबाव में विभागीय अधिकारी उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताडि़त कर रहे हैं। ऐसे में उसने एसपी ऑफिस में आवेदन देकर अनिवार्य रिटायरमेंट की मांग की है, जबकि अभी उसकी नौकरी के 12 साल बचे हैं।


अंबिकापुर में ट्रैफिक विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक देवनारायण सिंह नेताम आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। शहर के हर चौक-चौराहों पर वे मुस्तैदी व ईमानदारी के साथ काम करते देखे गए हैं। कोरोना काल में उन्होंने अपने काम से हर किसी को प्रभावित किया था। इसकी सराहना खुद सरगुजा पुलिस विभाग ने भी की थी।

विभाग व कई संगठनों द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। अब प्रधान आरक्षक विभागीय अधिकारियों की प्रताडऩा से परेशान हैं। ट्रैफिक विभाग के अधिकारी द्वारा 3 दिन पूर्व उन्हें एक ऑटो चालक पर नियमों के तहत जुर्माना लगाने पर सस्पेंड व बर्खास्त करने की चेतावनी दी गई।

लगातार प्रताडऩा से परेशान प्रधान आरक्षक को 21 मार्च को एसपी ने तलब किया। यहां एसपी ने भी उसकी गलती बताते हुए फटकार लगाई। अधिकारियों के इस रवैय्ये से प्रधान आरक्षक इतना परेशान हो गया कि उसने तत्काल अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए एसपी ऑफिस में आवेदन दे दिया।

ये था मामला
प्रधान आरक्षक देवनारायण नेताम ने अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए दिए गए आवेदन में लिखा है कि उसकी ड्यूटी इन दिनों रेलवे स्टेशन अंबिकापुर में विभाग द्वारा लगाई गई है। 20-25 दिन पूर्व वह अंबेडकर चौक स्थित शनि मंदिर से दो बाल्टी व 5 किलो चूना के साथ ऑटो क्रमांक सीजी 15 डीवी-3512 में सवार होकर रेलवे स्टेशन पहुंचा।

यहां ऑटो संघ द्वारा तय किए गए किराया चार्ट के अनुसार 30 रुपए देने लगा तो ऑटो चालक ने उससे 150 रुपए की मांग की। जब उसने चार्ट के अनुसार पैसे देने की बात कही तो चालक ने कहा कि 100 रुपए आपको देने ही पड़ेंगे। ऐसे में उसने 100 रुपए दे दिए। इसकी जानकारी उसने ऑटो संघ को देते हुए कहा कि ऑटो चालक द्वारा एक पुलिसकर्मी से अवैध वसूली की गई है।

प्रधान आरक्षक ने बताया कि 19 मार्च को जब ऑटो चालक रेलवे स्टेशन पहुंचा तो परमिट, शर्तों का उल्लंघन व बीमा फेल होने को लेकर उसपर चालानी कार्रवाई की गई। इसकी जानकारी ट्रैफिक ग्रुप व त्रिनेत्र गु्रप में दी गई। इस दौरान ऑटो संघ के दबाव में आकर ट्रैफिक प्रभारी द्वारा उसे बिना कार्रवाई छोडऩे की बात कही गई, अन्यथा सस्पेंड, बर्खास्त करने व विभागीय जांच कराने कहा गया।

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किया जा रहा प्रताडि़त
प्रधान आरक्षक देवनारायण नेताम ने बताया है कि यदि वह ट्रकों व पिकअप वाहनों से अवैध वसूली कर यदि ट्रैफिक प्रभारी को मंथली या डेली पहुंचाता तो मेरे ऊपर कार्रवाई करने की बजाय मेरी कार्रवाई को जायज ठहराते। ऐसे में जांच के नाम पर जबरन अधिकारी द्वारा प्रताडि़त किया जा रहा है। उपरोक्त कारणों से उसने एसपी से अनिवार्य रिटायरमेंट देने की मांग की है।

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दिल्ली के सीएम ने भी किया था फोन
प्रधान आरक्षक देवनारायण नेताम ने वर्ष 2020 में कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की हर तरह से काफी मदद की थी। उनके काम से प्रभावित होकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने 24 मई 2020 को उन्हें फोन कर उनके काम की सराहना की थी। तात्कालीन आईजी रतनलाल डांगी ने भी उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि प्रधान आरक्षक ने पुलिस विभाग में अपनी एक अलग छवि बनाई है।

एसपी ने नहीं उठाया फोन
इस संबंध में सरगुजा एसपी भावना गुप्ता का पक्ष जानने उनके विभागीय मोबाइल नंबर पर करीब 10 बार फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं आईजी ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है, एसपी ही बता पाएंगीं।


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