
अंबिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में ओटी सहायक के पद पर पदस्थ उदय पंडो, आदिवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। बचपन से सामाजिक दायित्वों को पूरा करने की ललक ने उन्हें आम लोगों से अलग बनाया है। 25 वर्षीय उदय पंडो (Uday Pando) सरगुजा संभाग के आदिवासी क्षेत्रों में जाकर लोगों को झाड़-फूंक (Jhadfunk) से दूर रहने के लिए जागरुक करने का काम कर रहा है।
सरगुजा संभाग आदिवासी (Tribals) बाहुल्य क्षेत्र है। गांवों में बसने वाले ज़्यादातर लोग झाड़-फूंक पर विश्वास करते हैं। छोटी-मोटी बीमारी से लेकर गंभीर बीमारी में भी लोग झाड़-फूंक व जड़ी-बूटी को तरजीह देते हैं। इस बुराई को दूर करने के लिए उदय पंडो गांव-गांव जाकर झाड़-फूंक से दूर रहने के लिए जागरुक करता है।
वह अपने खर्च पर अस्पताल लाकर इलाज करवाने का काम भी बखूबी कर रहा है। उदय पंडो का कहना है कि वह पिछले 6 वर्षों से इस काम में लगे हुए हैं।
कोरोना काल में भी ग्रामीण क्षेत्र से इलाज कराने अस्पताल पहुंचे मरीज व उनके परिजनों के बीच जाकर कोरोना संक्रमण के सबंध में भी जागरुक करने का काम उन्होंने किया। युवा मास्क, साबुन देकर लोगों से दूरी बनाकर हर काम करने की सलाह देता भी नजऱ आया।
इनका कराया इलाज
अब तक वह कैंसर, शरीर में खून की कमी, टीवी सहित कई घातक बीमारी से पीडि़त लोगों का इलाज करा चुका है। ये सभी वे मरीज़ हैं जो अस्पताल तक नहीं पहुंच पाए थे। ये गांवों में झाड़-फूंक के भरोसे ही अपना इलाज करा रहे थे।
समाज में शिक्षा की अलख जगाने पर जोर
उदय पंडो अवकाश के दिनों में ग्रामीण क्षेत्र में जाकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देते हैं। आदिवासी समाज के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं।
वे इसका लाभ कैसे लेना है इसकी जानकारी समाज के लोगों को देते हैं। आदिवासी समाज के लोगों को अपने बच्चों को स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र भेजकर पढ़ाने के लिए जोर देते हैं।
ड्यूटी खत्म होने पर भी करते हैं सेवा
उदय पंडो रोज ड्यूटी शुरू होने से दो घंटा पहले अस्पताल (Medical college hospital) पहुंच कर संभाग के ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीज व उनके परिजन का सहयोग करते हैं। आदिवासी समाज के कई ऐसे लोग होते हैं जो अशिक्षित हैं। इन्हें अस्पताल के सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं होती है।
जानकारी न होने के अभाव में मरीज व परिजन को भटकना पड़ता है। इस स्थिति में वह ड्यूटी के समय से पहले व खत्म होने के दो घंटे बाद तक हर रोज इस तरह के मरीजों का काम कराते हैं।
Published on:
07 Oct 2020 03:52 pm
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