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Video में देखें : जब 57 हाथियों ने घेर लिया छत्तीसगढ़ का ये गांव, मच गया हड़कंप, पहुंचे सीसीएफ-कलक्टर

पिछले कई दिनों से हाथियों के दल ने इस गांव के पास जंगल में जमा रखा है डेरा, फसलों को कर रहे तबाह, सीसीएफ व कलक्टर भी पहुंचे
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57 Elephants

57 Elephants

अंबिकापुर. पिछले काफी दिनों से शहर से लगे ग्राम मोहनपुर में हाथियों का दल डटा हुआ है। शुक्रवार की रात 57 हाथियों के दल ने चंद्रपुर ग्राम को चारों तरफ से घेर लिया था। यह देख ग्रामीणों सहित वन विभाग में हड़कंप मच गया। हाथियों के रुख को देखते हुए सभी यही सोचने लगे कि कहीं हाथी तबाही न मचा दें, लेकिन पहली बार हाथियों ने बस्ती के भीतर घुसने के बावजूद सिर्फ फसल ही चट किए। उन्होंने गांव में किसी को कोई जनहानि नहीं पहुंचाई।

शहर से लगे ग्राम मोहनपुर में पिछले काफी दिनों से 57 हाथियों का दल डटा हुआ है। शुक्रवार को मोहनपुर से लगे ग्राम चंद्रपुर में बड़ी अजीब स्थिति निर्मित हो गई थी। हाथियों के दल ने बस्ती के किनारे-किनारे चारों तरफ से घेर लिया था। इसकी जानकारी होने के बावजूद ग्रामीणों ने हाथियों को खदडऩे का प्रयास नहीं किया। इस दौरान हाथी अलग-अलग ग्रुप में बंट गए थे।

कुछ हाथी सड़क के किनारे खड़े नजर आ रहे थे तो कुछ गन्ने के खेत में खड़ी फसल को खा रहे थे। वन अमला ग्रामीणों को इस दौरान पूरी रात समझाइश देता रहा कि वे घर से बाहर न निकले और किसी भी तरह का नशा कर हाथियों के समीप जाने का प्रयास न करें।

इस दौरान वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ जगह-जगह आग जलाकर हाथियों को घरों से दूर रखने का भी प्रयास किया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हाथी बस्ती के अंदर पहुंचकर भी किसी को क्षति न पहुंचाए। इधर हाथियों ने गन्ने की फसल को चट कर दिया।


सीसीएफ व कलक्टर भी पहुंचे सुबह
सुबह वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा गांव से हाथियों के दल को खदडऩे में जुटा हुआ था। इसकी जानकारी लगते ही सीसीएफ केके बिसेन व सरगुजा कलक्टर किरण कौशल ने भी गांव पहुंच वहां की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से भी मुलाकात की और उन्हें दूर रहने की सलाह दी।


ग्रामीण भी हुए अभ्यस्त
पहली बार ऐसा देखा गया कि ग्रामीण भी हाथियों को नहीं छेड़ रहे हैं। हाथियों का यह दल बस्ती के चारों तरफ घूम रहा है लेकिन ग्रामीण उसे देख तो रहे हैं, लेकिन उसके पास नहीं जा रहे हैं। इसकी वजह से हाथी आक्रामक नहीं हो रहे हैं। आस-पास हाथियों के लिए भरपूर दाना-पानी होने की वजह से वे यहां काफी दिनों से डटे हुए हैं।

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