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अमेठी का एक घर ऐसा भी, जहां राहुल गांधी के चश्मे की होती है पूजा

खास बात यह है अमेठी में राहुल गांधी से जुड़ी कई कहानियां हैं। इनमें से एक है राहुल गांधी के चश्मे की कहानी।

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Rahul Gandhi

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अमेठी. अमेठी सांसद राहुल गांधी शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ गए। राहुल के कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी और मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जमकर कांग्रेसियों ने जश्न मनाया। कांग्रेसियों ने जहां लोगों को मिठाइयां खिलाकर बधाई, वहीं जमकर पटाखे फोड़कर दिवाली मनाई। खास बात यह है अमेठी में राहुल गांधी से जुड़ी कई कहानियां हैं। इनमें से एक है राहुल गांधी के चश्मे की कहानी।

सबसे पहले बात शुरू करते हैं अमेठी के जामो ब्लॉक से। यहां के पूरे बेगम मजरे रामपुर चौधरी के पुश्तैनी कांग्रेसी परमानंद पाण्डेय (75) बताते हैं कि देश में मोदी सरकार आ चुकी थी और अमेठी के जगदीशपुर में यूपीए सरकार के मेगा फूड पार्क प्रोजेक्ट को मोदी सरकार ने बंद कर दिया था। इसके विरोध में कांग्रेसियों ने उग्र धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें खुद सांसद राहुल गांधी शामिल हुए थे।

उपहार स्वरूप दिया अपना चश्मा

परमानंद पांडेय बताते हैं कि काफी भीड़ और धक्का-मुक्की के चलते मैं वहां गिर पड़ा। तभी राहुल गांधी की निगाह मेरे ऊपर पड़ी। उन्होंने तुरंत अपने साथ चल रहे प्रतिनिधि से कहकर मुझे उठवाया। राहुल ने मुझसे पूछा, चाचा आपको कहीं चोट तो नहीं आई। मैने जवाबद दिया नहीं। परमानंद पांडेय आगे बताते हैं, इसके बाद राहुल गांधी ने अपने धूप के चश्मे को निकालकर मुझे दे देते हैं और कहते हैं ये चश्मा आप आप लगा लीजिए। परमानंद ने जवाब दिया, हमें दिखता है, धूप हमें क्या करेगी? हम किसान के बेटे हैं। राहुल गांधी ने कहा, इस चश्मे को आप उपहार स्वरूप ही रख लीजिए।

भगवान के पास रखा है चश्मा, करते हैं पूजा

अब आलम यह है कि परमानंद पांडेय जहां राहुल गांधी से उपहार स्वरूप मिले उस चश्मे को संजोकर रखे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर दिन में उसे एक-दो बार साफ करते हैं। यही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उपहार स्वरूप मिलेे उस चश्मे को वो भगवान की मूर्ति के पास रखते हैं और उसे भी अगरबत्ती एवं माला चढ़ाकर पूजते हैं।