आगरा

राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज ने अयोध्या में राम मंदिर के सवाल पर क्या कहा, देखें वीडियो

राधास्वामी मत के अधिष्ठाता दादाजी महाराज ने धार्मिक विषयों पर राधास्वामी मत के आदि केन्द्र हजूरी भवन, पीपल मंडी में पत्रिका से बातचीत की।

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Apr 30, 2018
dadaji maharaj
दादाजी महाराज

डॉ. भानु प्रताप सिंह

आगरा। राधास्वामी मत के अधिष्ठाता दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) का कहना है कि आस्था पर कोई सवाल नहीं करना चाहिए। उनसे अय़ोध्या में राम मंदिर की आस्था पर सवाल पूछा गया था। दादाजी महाराज ने धार्मिक विषयों पर राधास्वामी मत के आदि केन्द्र हजूरी भवन, पीपल मंडी में पत्रिका से बातचीत की। बता दें कि दादाजी महाराज इतिहासवेत्ता के साथ पुरातत्ववेत्ता भी हैं। वे आगरा विश्वविद्यालय के दोबार कुलपति रहे हैं, जो एक रिकॉर्ड है।

पत्रिकाः भारत को धर्म प्रधान देश कहा जाता है, धर्म क्या है?

दादाजीः भारत को धर्म प्रधान देश नहीं कहते हैं, लेकिन यहां समन्वय है। नागरिकों के यहां अधिकार हैं। उनमें भी समन्वय है। शुद्ध मानवता के सिद्धांतों का भारतीयकरण है।

पत्रिकाः क्या मंदिर में जाना, नमाज पढ़ना, चर्च में जाना धर्म है?

दादाजीः ये तो अपनी-अपनी आस्था है और आस्था पर कोई सवाल नहीं करते हैं। मैं स्वयं आस्था में विश्वास रखता हूं। जो भी आस्था रखता है, मुझे उसके प्रति सहानुभूति है।

पत्रिकाः जहां तक आस्था की बात है तो अयोध्या में राम मंदिर को लेकर एक वर्ग की आस्था है और दूसरे की नहीं है, इसमें क्या होना चाहिए?

दादाजीः जो उसकी आस्था है, वो अपनी आस्था पर रहे। इन सब बातों का कोई महत्व नहीं है। एक आस्था बहुत पुराने समय से चली आ रही है। भारत की आस्था को चोट पहुंची है।

पत्रिकाः भारत की आस्था पर चोट क्या अंग्रेजों ने पहुंचाई है?

दादाजीः विदेशियों ने चोट पहुंचाई है।

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पत्रिकाः धर्म के नाम पर ढकोसला बहुत हो रहा है। इसका खंडन किस तरह से करना चाहिए?

दादाजीः इसके लिए बहुत बहुत धार्मिक सुधार हुए हैं। ये सुधार जन-जन तक जाने चाहिए। 19वीं शताब्दी में सामाजिक सुधार और धार्मिक सुधार हुए हैं। उसको लोग भूल रहे हैं। हमने कभी कट्टरता नहीं दिखाई। कट्टरता का सामना जरूर किया है।

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पत्रिकाः ऐसा कहा जाता है कि कट्टरता न होने के कारण भारत गुलाम रहा?

दादाजीः नहीं। विदेशी आक्रमणकारियों का आतंक है। उन्होंने हमारे उदारवादी रवैया का लाभ उठाया। उस समय के राजा एक नहीं हो पाए। वे सोच भी नहीं पाए कि इस तरह का कोई आक्रमण हो सकता है।

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Updated on:
30 Apr 2018 01:10 pm
Published on:
30 Apr 2018 01:20 pm