
Manjalpur By Election Result 2026:गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर इस समय सबकी नजर है। वजह सिर्फ उपचुनाव नहीं है, बल्कि यह भी है कि यह सीट लंबे समय से बीजेपी के मजबूत इलाकों में गिनी जाती रही है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां लगातार जीत दर्ज की। अब पार्टी के पुराने नेता योगेश पटेल के निधन के बाद सीट खाली हुई है। ऐसे में बीजेपी के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के लिए इस सीट पर वापसी का मौका है।
मांजलपुर सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनी थी। इसके बाद 2012 में पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुआ। बीजेपी ने योगेश पटेल को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 और 2022 में भी योगेश पटेल ही यहां से जीते।
2022 के चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत मिली थी। योगेश पटेल को 1,20,133 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 19,379 वोट मिले। दोनों के बीच करीब एक लाख वोटों का अंतर था। इसी मजबूत रिकॉर्ड की वजह से मांजलपुर को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है।
मांजलपुर की राजनीति में योगेश पटेल का नाम काफी बड़ा रहा है। वह गुजरात के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने लंबे समय तक चुनावी राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखी। वह कुल आठ बार विधायक चुने गए।
उन्होंने पहले वडोदरा की रावपुरा सीट से चुनाव जीता था। बाद में परिसीमन के बाद मांजलपुर सीट से चुनाव लड़ा और 2012, 2017 और 2022 में लगातार जीत हासिल की।
2 जून को लंबी बीमारी के बाद योगेश पटेल का निधन हो गया। इसके बाद मांजलपुर सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव कराना पड़ा। बीजेपी ने इस बार सतीश गोविंदभाई पटेल को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी को मैदान में उतारा है।
कांग्रेस के लिए मांजलपुर का चुनाव इसलिए खास है क्योंकि पार्टी को बीजेपी के मजबूत इलाके में मुकाबला करने का मौका मिला है। यहां जीत हासिल करना कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता होगी।
इस चुनाव में एक और बात काफी चर्चा में रही। 30 जुलाई को हुए मतदान में सिर्फ करीब 37.5 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 63.61 प्रतिशत मतदान हुआ था। कम मतदान का फायदा किसे मिलेगा, यह नतीजे आने के बाद साफ होगा। अगर कांग्रेस अपने समर्थकों को ज्यादा संख्या में वोट डालने के लिए तैयार कर पाई है, तो वह बीजेपी के पुराने वोट बैंक को चुनौती दे सकती है।
बीजेपी के पास इस सीट पर मजबूत चुनावी रिकॉर्ड है, लेकिन इस बार उसके सामने एक अलग चुनौती भी है। योगेश पटेल जैसा जाना-पहचाना चेहरा अब मैदान में नहीं है। इसलिए देखना होगा कि उनके नाम और पुराने काम का फायदा बीजेपी के नए उम्मीदवार सतीश पटेल को कितना मिलता है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का मामला नहीं है। अगर पार्टी बीजेपी के इस मजबूत गढ़ में मुकाबला बराबरी का बनाती है या सीट जीत लेती है, तो इसे गुजरात में कांग्रेस के लिए बड़ा संकेत माना जाएगा।
इसी वजह से मांजलपुर का उपचुनाव एक सीट से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यह चुनाव बताएगा कि बीजेपी का पुराना मजबूत आधार कितना कायम है और कांग्रेस उसमें कितनी सेंध लगा पाती है।