पुष्कर के नए मेला मैदान में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमंत कथा में प्रेम भक्ति के पांच लक्षण बताए। भगवान को मांगना, सुमिरन, समर्पण, भाव और अनन्य प्रेम। गुरु महिमा और पुष्कर तीर्थ का महत्व बताया। साथ ही यहां मठ बनाने की इच्छा जताई।
पुष्कर (अजमेर): पुष्कर के नए मेला मैदान में मंगलवार को दूसरे दिन व्यास पीठ से हनुमंत कथा सुनाते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रेम भक्ति के पांच लक्षण बताए। उन्होंने कहा कि प्रेम भक्ति का प्रथम लक्षण भगवान को मांगो।
हमेशा भगवान का ही सुमिरन रहना दूसरा लक्षण है। इस भक्ति में साधक को केवल भगवान से ही प्रेम करना चाहिए। जैसे पानी में डूबोगे तो मृत्यु निश्चित है। वैसे ही भगवान की भक्ति में डूबोगे तो मुक्ति निश्चित है।
पुष्कर के नए मेला मैदान में हनुमंत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को उपासक शास्त्री ने प्रेम भक्ति के लक्षण के तहत तीसरा लक्षण भगवान के प्रति संपूर्ण समर्पण तथा चौथा लक्षण भाव का भूखा है, भगवान को बताया। पांचवां लक्षण अनन्य भाव को बताते हुए कहा कि भाव से भगवान प्रसन्न होते हैं, भगवान को भाव प्रिय हैं।
हनुमान और भगवान राम के आपसी प्रेम के बारे में बताते हुए शास्त्री ने कहा कि रामजी की कथा सुनने के रसिक हनुमान जी हैं। रामकथा सुनने हनुमान और हनुमान कथा सुनने राम आते हैं।
उन्होंने तुलसीदास को हनुमान से मिलाने की प्रेत की कहानी सुनाई और कहा कि भगवान से मांगने वाला भक्त है। भगवान को मांगने वाला परम भक्त होता है। भागवत और रामायण की नवधा भक्ति बताई। इसी अवसर पर सांवरियो है, सेठ म्हारी राधाजी सेठानी है…भजन सुनाया तो श्रोता झूम उठे।
उन्होंने कहा कि भगवान से निष्पाप प्रेम करो, वो बहुत कुछ देगा। मांगोगे तो वही मिलेगा, जो तुमने मांगा है। गुरु की महिमा को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा की जिसका गुरु बलवान होता है, उसका चेला पहलवान होता है। इसीलिए हनुमान चालीसा की शुरुआत भी श्री गुरुचरण सरोज रज से तथा अंतिम पंक्ति भी गुरु से ही पूरी की गई है।
कथा में सिख गुरु का कश्मीरी पंडितों के लिए किए गए बलिदान पर चर्चा में बोले सो निहाल, वाहे गुरु दा खालसा, वाहे गुरु दी फतेह…का जयकारा लगाते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों पर आक्रमण के समय सभी गुरु तेगबहादुर के पास गए थे।
वहीं, गुरु गोविंद सिंह ने पंडितों की आंखों में आंसू देखे और पिता तेग बहादुर ने कहा हमारा धर्म परिवर्तन कराओ तो भारत का धर्म परिवर्तन होगा। ये कहते हुए तलवार उठा ली। पुष्कर में गुरुद्वारा भी है। गुरु तेग बहादुर न होते तो आज हिंदू धर्म नहीं बचा होता।
पुष्कर में कथा दरबार लगाने का सौभाग्य मिला। तीर्थों का गुरु होने एवं पंचतीर्थो में सबसे ज्यादा महत्ता पुष्कर की है। पुष्कर में शिव विष्णु ब्रह्मा तत्व है। राजस्थान बहुत अद्भुत है। आप चारों धाम कर लेना लेकिन, पुष्कर नहीं आओगे तो फल नहीं मिलेगा। ये ऋषियों की तपोभूमि है। ब्रह्मा जगतपिता हैं।
जो मनुष्य है उनके पूर्वज पुष्कर से हैं, अजमेर के हिंदू अपने ग्रैंडफादर के पास आया करो। जो पूर्वज नहीं मानते वो कोई और हैं। ज्यादा बोलेंगे तो मीडिया वाले छाप देंगे। भागवत 52 पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण में पुष्कर का लेख है।
व्यास पीठ से कथामृत बरसाते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने पुष्कर में मठ बनाने की इच्छा व्यक्त की। बताया कि इसका मुख्य कारण यह है कि पास में ‘अजमेर’ है। मठ बनाने से चादर चढ़ाने वाले हिंदू तो मेरे मठ से जुड़ेगे। मंदिर बनाने पर कम भरोसा करते हैं। हम मानस पूजा करते हैं। चेला मिलेगा तो कैंसर हॉस्पिटल बनवाऊंगा।