कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने अजमेर में नववर्ष मिलन समारोह में बेबाक बयान दिए। राजनीति को कॉमर्शियल बताते हुए कहा कि वे पद नहीं, जनता की सेवा के लिए राजनीति में हैं। आरक्षण, पेपर लीक, RPSC, वसुंधरा राजे और हनुमान बेनीवाल पर भी खुलकर बोले।
Minister KirodiLal Meena: राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा रविवार को अजमेर के कुंदननगर स्थित जीसीए ग्राउंड में आयोजित नववर्ष मिलन समारोह में शामिल हुए। अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में उन्होंने मंच से कई बड़े खुलासे किए और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने साफ कहा कि आज की राजनीति व्यापार (कॉमर्शियल) हो गई है, लेकिन वे पद के भूखे नहीं, बल्कि जनता की सेवा के लिए राजनीति में हैं।
किरोड़ीलाल मीणा ने खुलासा किया कि समरावता हिंसा मामले में गिरफ्तार युवाओं से जब वे जेल में मिलने पहुंचे, तो उन्हें शासन स्तर पर डांट खानी पड़ी। उनसे कहा गया कि एक कैबिनेट मंत्री रहते हुए उन्हें अपराधियों से नहीं मिलना चाहिए।
इस पर किरोड़ी ने दोटूक जवाब दिया, संकट की घड़ी में अगर मैं अपने समाज के भाई-बहनों को नहीं संभालूंगा, तो इससे बड़ा पाप कोई नहीं होगा। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? डांट ही तो पड़ेगी, मंत्री पद ही तो जाएगा।
मंत्री मीणा ने अपने राजनीतिक सफर के उतार-चढ़ाव साझा करते हुए बताया कि एक समय पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था और उनका टिकट भी काट दिया गया था। उन्होंने कहा, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने चप्पे-चप्पे पर सेना और आसमान में ड्रोन तैनात कर दिए थे, लेकिन दौसा की जनता ने मुझे रिकॉर्ड मतों से निर्दलीय सांसद बनाया। मैंने कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रत्याशियों की जमानत जब्त करवा दी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज वे और वसुंधरा राजे फिर से एक ही पार्टी (भाजपा) में साथ हैं।
आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी हमलों का जवाब देते हुए किरोड़ी ने हुंकार भरी कि जब तक उनके शरीर में प्राण हैं, कोई भी आरक्षण को छू नहीं सकता। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय 32 विधायकों ने आरक्षण के समर्थन में साथ आने का वादा किया था। लेकिन जब दिल्ली चिट्ठी भेजने की बारी आई, तो 31 भाग गए। वे अकेले थे जो सड़क पर संघर्ष करते रहे।
कांग्रेस शासन के दौरान हुए पेपर लीक मामलों पर बोलते हुए किरोड़ी ने कहा कि वे जेल में बंद RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से मिलने गए थे। कटारा ने उन्हें बताया कि वह 1 करोड़ 60 लाख रुपए देकर सदस्य बना था।
किरोड़ी ने मांग की कि सिर्फ आदिवासियों (कटारा) को जेल भेजने से काम नहीं चलेगा। पूर्व अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़, जिनकी मिलीभगत से पेपर लीक हुए, उनके हाथों में भी हथकड़ी लगनी चाहिए। मैं इसके लिए मुख्यमंत्री से बात करूंगा।
जब उन्हें कृषि मंत्रालय मिला, तो कई लोगों ने इसे 'छोटा' विभाग बताया। इस पर किरोड़ी ने कहा, आज देश में अगर लोग किसी कृषि मंत्री को जानते हैं, तो वह राजस्थान का मंत्री है। मैंने दिखा दिया कि काम करने वाले के लिए कोई पद छोटा नहीं होता। पद तो बड़े-बड़े लोगों के पास हैं, लेकिन उनकी थानेदार भी नहीं सुनता।
समारोह के दौरान किरोड़ी लाल मीणा का एक अलग रूप भी दिखा, जब वे महिलाओं के आग्रह पर उनके साथ लोक गीतों पर थिरकते नजर आए। उन्होंने कहा, ये हमारी संस्कृति है और इसे जिंदा रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी में गिरते संस्कारों पर चिंता जताते हुए कहा कि माताएं ही बच्चों की असली 'यूनिवर्सिटी' हैं, उन्हें ही बच्चों को बिगड़ने से बचाना होगा।
सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ चल रहे हालिया विवाद पर उन्होंने नरमी दिखाते हुए कहा कि यह परिवार का मामला है और वे इसे गंभीरता से नहीं लेते। अगर बेनीवाल बात करेंगे, तो वे भी बात करने के लिए तैयार हैं।