अजमेर

Seminar: भाषा और निबंध में शरीर और आत्मा जैसा नाता

एसपीसी-जीसीए में हुआ परिसंवाद कार्यक्रम। राजस्थानी भाषा के लेखक और साहित्यकारों ने किया विचार-विमर्श।
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Oct 13, 2019
seminar in ajmer
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अजमेर.

भाषा (language) और निबंध (esaay) का आत्मिक संबंध है। वास्तव में निबंध भाषा के विकास का परिचायक और कसौटी होते हैं। यह विचार सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय और साहित्य अकादमी (sahitya academy) नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित परिसंवाद कार्यक्रम में सामने आए।

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राजस्थानी निबंध में सांस्कृतिक (cultural) चेतना विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. सी. पी. देवल ने कहा कि निबंध किसी भाषा (language) का सारथी होते हैं। यह भाषा को वृहद और सुदृढ़ बनाते हैं। राजस्थान भाषा अपनत्व से जुड़ी है। इसके शब्दों का विपुल भंडार है। जिस भाषा में हृदय (heart) को तरंगित करने, सुनने वाले के कानों (ears) में मिठास घोलने का भाव है, वह श्रेष्ठतम होती है। लेखकों को राजस्थानी भाषा में श्रेष्ठ निबंध (esaay) रचने चाहिए, जिससे भाषा मजबूत बनेगी।

निबंध लेखक कम
सहित्यकार मधु आचार्य ने कहा कि मौजूदा दौर में राजस्थानी भाषा (rajasthani language) में उपन्यास (novel)और कहानियां (stories) लिखने वाले अधिक हैं। लेकिन निबंध लिखने वाले कम हैं। निबंध लेखन से मायड़ भाषा का त्वरित विकास हो सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीलाल मोहता ने कहा कि दुनिया भर में राजस्थानी बोलने वाले लोग मौजूद हैं। हमारी भाषा किसी से कमतर नहीं है।

यह भी बोले..
सोहनदान चारण ने राजस्थान निबंध में युगबोध, डॉ. नमामि शंकर आचार्य ने राजस्थानी निबंध में संस्कृति, कृष्ण कुमार आशु ने राजस्थानी निबंध में समाज सुधार, डॉ.मंगत बादल ने राजस्थानी निबंध में व्यक्ति (person) पर चर्चा की। इसी तरह विमला महरिया ने राजस्थानी निबंध में ग्रामीण जीवन (rural) पर चर्चा की। राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत व्यास ने कहा कि मनुष्य निजी स्वार्थ को बढ़ावा देने में जुटा है। हमें ज्यादा से ज्यादा राजस्थानी भाषा में श्रेष्ठ और विश्लेषणात्मक (special) निबंध रचने की जरुरत है। उपाचार्य डॉ. एस. के. गुप्ता ने धन्यवाद दिया।

Updated on:
13 Oct 2019 03:34 pm
Published on:
13 Oct 2019 03:34 pm