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मायड़ भाषा से बढ़ेगा हिन्दी का मान

विश्व मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को हाड़ौती उत्सव आयोजन समिति के तत्वावधान में मायड़ भाषा गौरव सम्मान -2017 समारोह मनाया गया।
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Vineet Kumar Singh

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Updated: 21 Feb 2017, 1:55 AM IST

mayadh bhasha gaurav samman

mayadh bhasha gaurav samman

बसंत विहार में मोदी कॉलेज के सभागार में आयोजित समारोह में हाड़ौती के प्रसिद्ध साहित्यकारों व कवियों दुर्गादान सिंह गौड़, अम्बिका दत्त चतुर्वेदी, अतुल कनक, मुकुट मणि राज, ओम नागर, विश्व मित्र दाधीच को मायड़ भाषा गौरव सम्मान- 2017 से सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य वक्ता गुजरात विश्वविद्यालय के प्रो. संजीव दुबे ने कहा कि मातृभाषा जीवन का आधार है और इसे नई पीढ़ी को सौंपा जाना चाहिए। मातृभाषा ज्ञान, मान व स्वाभिमान की भाषा होती है। इसके बिना हम पंगू हैं।

अध्यक्षता करते हुए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नरेश दाधीच ने कहा कि मायड़ भाषा को सम्मान मिलना चाहिए। इससे हिंदी का मान कम नहीं होगा। प्रो. दाधीच ने अपनी बारिश पर आधारित कविता 'तन भीगा, मन भीगा, जन-जन भीगा सुनाई। विशिष्ट अतिथि कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संविधान के अनुच्छेद 8 में शामिल कराने के लिए मामले को विधानसभा में भी उठाऊंगा।

वर्धमान महावीर खुला विवि में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मीता शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम बौद्धिक संवेदना जगाने वाला है। उन्होंने हाड़ौती के कवि सूर्यमल्ल मिश्रण, शिवदास गाडण, भैरू लाल काला बादल, धन्नालाल सुमन, रघु राज सिंह हाड़ा आदि को याद किया। समिति के महामंत्री पंकज मेहता ने कहा कि उत्सव के माध्यम से हाड़ौती के गौरव को सम्मानित किया जाता है। समिति हमेशा हाड़ौती के मान और प्रतिष्ठा के लिए काम कर रही है।

समारोह में पूर्व महापौर सुमन श्रृंगी, मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन, मोदी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजेमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक एनके जोशी मंचासीन रहे। आयोजन समिति के उद्धवदास मरचूनिया, महावीर जैन, भूपेंद्र खींची ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रारंभ में समिति के संस्थापक दिवंगत जम्मू कुमार जैन, प्रेमजी प्रेम को याद किया। संचालन शुभम लोढ़ा एवं हुकुम चंद जैन ने किया।