कुछ छात्रों के टिकट के लिए छात्र संगठनों के राष्ट्रीय-प्रांतीय नेताओं पर उन्होंने जबरदस्त दबाव भी बनाया।
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
छात्र राजनीति (student politics) से दूर रखने का दावा करने वाले कांग्रेस (congress) और भाजपा (bjp) नेताओं ने ‘ टिकट ’ वितरण (ticket distribution) में जबरदस्त दखल दी है। कई छात्र-छात्राओं के नाम विधायकों-मंत्रियों की पसंद से तय हुए हैं। कुछ छात्रों के टिकट के लिए छात्र संगठनों (student organization) के राष्ट्रीय-प्रांतीय नेताओं पर उन्होंने जबरदस्त दबाव भी बनाया।
कॉलेज (college) और विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) में 27 अगस्त को चुनाव होने हैं। बुधवार सुबह से देर शाम तक प्रत्याशियों (candidates) के चयन की माथापच्ची चली। एनएसयूआई (nsui), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (abvp) और अन्य छात्र संगठनों के पदाधिकारी प्रत्याशियों (candidates) को परस्पर मतभेद (differneces) रहे। कांग्रेस और भाजपा के कई विधायकों (MLA), मंत्रियों (ministers) का भी भी इसमें दखल रहा। अजमेर सहित प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय-कॉलेज में छात्रनेताओं (students leaders)के टिकट तय करने में उनकी भूमिका रही।
विश्वविद्यालय-जीसीए अहम...
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई सहित अन्य संगठनों (students organization) के लिए यूं छात्रसंघ चुनाव (chatr sngh chunav) अहम है। लेकिन सभी संगठनों ने सबसे ज्यादा तवज्जो सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय (spc-gca) और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu) को दी है। इन्हीं दोनों संस्थाओं के प्रत्याशी चयन में सर्वाधिक माथापच्ची हुई। इसमें जातिगत (caste factor) समीकरण, प्रत्याशी की साल भर की सक्रियता (activeness), शैक्षिक योग्यता (academic qulification) और अन्य बिन्दुओं पर संगठन पदाधिकारियों और समर्थकों में टकराव (tention) हुआ।
नेताओं की दखल पर टिकट
एनएसयूआई और अभाविप के राष्ट्रीय-प्रांतीय नेताओं पर कांग्रेस और भाजपा के विधायक-मंत्री (Ministers-MLA) भारी पड़े। सुबह से ही प्रत्याशियों को लेकर परस्पर विरोध (diffrences) कायम रहे। कुछ विधायक तो पसंदीदा छात्र-छात्राओं (girls and boys) के टिकट को लेकर डटे रहे। कुछ संस्थाओं (intitutes) में जिताऊ प्रत्याशी (winning candidates) होने के बावजूद कांग्रेस-भाजपा नेताओं ने टिकट कटा (tickets cut) दिए। अब इसका असर बगावत के रूप में देखने को मिलेगा।