सुप्रीम कोर्ट ने एपीओ भर्ती-2024 में बड़ा फैसला देते हुए कहा कि शैक्षणिक योग्यता की कटऑफ तिथि आवेदन की अंतिम तिथि ही होगी। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।
अजमेर: सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती-2024 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक योग्यता की निर्णायक तिथि आवेदन की अंतिम तिथि ही होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ कहा कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम-1978 में अंतिम वर्ष के छात्रों को दी गई छूट अक्टूबर 2002 में हटा दी गई थी। इसलिए योग्यता का आकलन आवेदन की अंतिम तिथि तक उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही होगा। कोर्ट ने कहा कि साक्षात्कार तक योग्यता पूरी करने की छूट देने से चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ेगी और आयोग पर प्रशासनिक बोझ भी पड़ेगा।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने 7 मार्च 2024 को एपीओ के 181 पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें लॉ स्नातक की डिग्री अनिवार्य रखी गई। इसके बावजूद ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया, जिनकी डिग्री अंतिम तिथि तक पूरी नहीं हुई थी।
आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों से आवेदन वापस लेने को कहा, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए कहा था कि परीक्षा तिथि तक डिग्री मिलने पर उन्हें पात्र माना जाए। इसके खिलाफ आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर दिए गए।
राजस्थान हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक एसआई भर्ती-2021 की परीक्षा रद्द करने का फैसला देने के बावजूद राज्य सरकार मौन है। सुप्रीम कोर्ट से सफल अभ्यर्थियों की एसएलपी खारिज होने के बाद सरकार पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सरकार अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। हालांकि, सरकार के पास खुद एसएलपी दायर करने का विकल्प है, लेकिन कोर्ट की टिप्पणियों के बाद इसकी संभावना कम मानी जा रही है।
आरपीएससी सचिव रामनिवास मेहता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर सरकार के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार के निर्णय के बाद आयोग विधिक राय लेकर परीक्षा दोबारा कराने पर फैसला करेगा। यह भर्ती 859 पदों के लिए हुई थी, जिसमें करीब 3.8 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
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