अलीगढ़

‘साहब, मैं जिंदा हूं’, अलीगढ़ में खुद को जीवित साबित करने के लिए एक साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा पीड़ित

Living man dead in government records: बेनामी पुत्र अमर सिंह पिछले एक साल से वे दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, हर अधिकारी के सामने हाथ जोड़कर यही गुहार लगा रहे हैं- 'साहब, मैं जिंदा हूं।'
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Jul 16, 2026
benami amar singh
बेनामी अमर सिंह

Aligarh News: अलीगढ़ के लोधा ब्लॉक के गांव गोविंदपुर फगोई में रहने वाले बेनामी पुत्र अमर सिंह आज भी सांस ले रहे हैं, खेतों में मेहनत करते हैं, परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड्स में वे 'मृत' घोषित हैं। पिछले एक साल से वे दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, हर अधिकारी के सामने हाथ जोड़कर यही गुहार लगा रहे हैं- 'साहब, मैं जिंदा हूं।' उनकी आंखों में निराशा है, आवाज में थकान, लेकिन उम्मीद अभी बाकी है। राशन बंद, आधार निष्क्रिय, सरकारी योजनाओं से हाथ धो बैठे इस गरीब किसान की कहानी भारतीय नौकरशाही की लापरवाही और आम आदमी की मजबूरी की मिसाल बन गई है।

'राशन रुका, पहचान छिनी'

बेनामी जब करीब एक साल पहले राशन कार्ड की ई-केवाईसी कराने पहुंचे, तो मशीन ने उन्हें 'मृत' बता दिया। जांच हुई तो आधार डेटाबेस में उनकी मौत दर्ज पाई गई। हाड़-मांस का इंसान सामने खड़ा है, लेकिन कंप्यूटर स्क्रीन पर 'डेड' का स्टेटस। परिवार की रोटी का सहारा छिन गया। बेनामी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'राशन नहीं मिला तो बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ा। बीमार होने पर इलाज के पैसे कहां से लाएं? मैं मरा नहीं हूं, लेकिन सिस्टम ने मुझे मार दिया।'

जिंदा इंसान को कागजों में मार डाला!

ग्रामीण जीवन की सच्चाई यह है कि बेनामी जैसे छोटे किसान के लिए आधार और राशन सिर्फ कागज नहीं, जिंदगी की रीढ़ हैं। बिना इनके न राशन की दुकान खुलती है, न बैंक खाता चलता है, न कोई सरकारी मदद। गांव में लोग सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं कर पाता। बेनामी रोजाना सुबह बस पकड़कर अलीगढ़ शहर पहुंचते हैं, डीएम ऑफिस, ब्लॉक, तहसील… हर जगह दस्तक देते हैं। कभी फाइल बढ़ती नहीं होती, तो कभी अधिकारी कहते हैं- ऊपर से ऑर्डर आएगा। एक साल की इस दौड़ में उनके जूते घिस गए, पैसे खर्च हो गए, स्वास्थ्य बिगड़ गया।

न्याय के लिए गुहार

डीएम कार्यालय में दिए प्रार्थना पत्र के साथ उन्होंने मजबूत दस्तावेज जमा किए हैं- सांसद अनूप प्रधान का सत्यापन पत्र, ग्राम प्रधान का प्रमाण-पत्र और अपना मतदाता पहचान पत्र। ये सब गवाही देते हैं कि बेनामी जिंदा हैं और सक्रिय नागरिक हैं। मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने कहा है कि इस प्रकरण की जांच खंड विकास अधिकारी से कराई जाएगी और विसंगति की वजह पता लगाई जाएगी।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों ऐसे 'कागजी मृतकों' की कहानी है, जहां सिस्टम की गलती आम आदमी को दर-दर भटकाती है। आधार जैसी विशाल डेटाबेस में एक क्लिक की गलती जिंदगी बर्बाद कर देती है।

Updated on:
16 Jul 2026 07:29 pm
Published on:
16 Jul 2026 07:29 pm