
Aligarh Murder Case: पति सुरेश की हत्या में अदालत ने पत्नी बीना और उसके प्रेमी मनोज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा ने दोनों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने मृतक की छोटी बेटी रोशनी से पूछा कि वह क्या चाहती है। इस पर वह फूट-फूटकर रो पड़ी और बोली- जज अंकल, मुझे मम्मी से कोई लगाव नहीं है। इसने मेरे पापा को मारा है, इसे फांसी दे दो।
मामले में अभियोजन के सामने सबसे अहम कड़ी सुरेश के 15 वर्षीय बेटे नीतेश की गवाही रही। नीतेश ने अदालत में उस घटना के बारे में बयान दिया, जिसका वह प्रत्यक्षदर्शी था। उसके अलावा सुरेश के भाई विजय सिंह समेत आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट के साथ हत्या में इस्तेमाल तमंचा, कारतूस और मोबाइल को भी साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।
अभियोजन के मुताबिक, 10 जुलाई 2025 की सुबह करीब साढ़े आठ बजे सुरेश अपने घर पर था। उसका भाई विजय सिंह भी घर के बाहर मौजूद था। इसी दौरान मनोज वहां पहुंचा। आरोप है कि बीना ने मनोज को सुरेश की तरफ इशारा करते हुए उसे गोली मारने के लिए कहा। इसके बाद मनोज ने तमंचा निकाला और सुरेश के सीने में गोली मार दी। गोली लगते ही सुरेश की मौके पर मौत हो गई। घटना अलीगढ़ के बरला थाना क्षेत्र के कस्बे में कोठी आंबेडकर स्कूल के पास हुई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आठ गवाहों को अदालत में पेश किया। सुरेश के भाई विजय सिंह और उसके बेटे नीतेश की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। इसके अलावा डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी अदालत के सामने रखी। विवेचक अरुण पवार और पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज हुए। घटनास्थल से बरामद तमंचे और कारतूस के साथ एफएसएल रिपोर्ट और मोबाइल समेत अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बीना और मनोज को दोषी माना।
फैसले के दिन सुरेश के तीनों बच्चे 15 वर्षीय नीतेश, पुनीत और सबसे छोटी रोशनी अपनी बुआ कसूरी के साथ कोर्ट पहुंचे थे। बीना की नजर लगातार बच्चों पर थी। वह उम्मीद करती रही कि बच्चे उसकी तरफ देखेंगे, लेकिन तीनों ने उससे दूरी बनाए रखी। फैसला सुनाए जाने के बाद बीना रोने लगी। वह बार-बार बच्चों की तरफ देखती रही, मगर बच्चों ने उसकी ओर नजर तक नहीं उठाई। दूसरी तरफ मनोज फैसले के दौरान शांत खड़ा रहा। पिता की मौत और मां के जेल जाने के बाद तीनों बच्चों की जिम्मेदारी अब उनकी बुआ कसूरी के कंधों पर है।