अलीगढ़

सोशल मीडिया पर छाते ही चली गई गोलू लंगूर की नौकरी, 12 हजार मिलती थी सैलरी, अब इधर-उधर भटकेगा

Golu Langur Aligarh : अलीगढ़ के DS कॉलेज में 12,000 की सैलरी पर तैनात 'गोलू लंगूर' की नौकरी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चली गई। जानिए कैसे एक लंगूर बना सिक्योरिटी गार्ड और क्यों वन विभाग ने उसे पद से हटाया।

2 min read
गोलू लंगूर को नौकरी से हटाया गया, PC- Patrika

अलीगढ़ : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित धर्म समाज महाविद्यालय (डीएस कॉलेज) का 'गोलू लंगूर' इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। करीब दो साल तक 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी निभाने वाले इस लंगूर को अब वन विभाग ने आजाद कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग की नजर पड़ी और फिर गोलू की सरकारी नौकरी पर संकट आ गया।

ये भी पढ़ें

आगरा में मशहूर यूट्यूबर के बेटे के साथ स्कूल में मारपीट, तीन दांत टूटे, मुंह से निकला खून

कैसे मिली थी नौकरी?

डीएस कॉलेज लंबे समय से बंदरों के आतंक से परेशान था। बंदरों के झुंड छात्र-छात्राओं का खाना छीन लेते, उन पर हमला कर देते और क्लासरूम में घुसकर किताबें-कॉपियां तक बर्बाद कर देते थे। डर के मारे छात्रों का कैंपस में आना-जाना मुश्किल हो गया था।

इस समस्या से निजात पाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने एक अनोखा तरीका अपनाया। एक प्रशिक्षित लंगूर को बाकायदा सिक्योरिटी गार्ड के पद पर नियुक्त किया गया। छात्रों ने उसे प्यार से गोलू नाम दिया। गोलू की ड्यूटी का समय तय था। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक। वेतन भी तय था 12,000 रुपये प्रतिमाह, जो बाकी कर्मचारियों की तरह ही दिया जाता था।

गोलू लंगूर के आने के बाद नहीं दिखते थे बंदर

गोलू की तैनाती का असर तुरंत दिखा। बंदरों के झुंड परिसर के आसपास भी नहीं फटकते थे। न कोई शोर, न मारपीट बस गोलू का होना ही काफी था। धीरे-धीरे कॉलेज परिसर से बंदरों की समस्या लगभग पूरी तरह खत्म हो गई।

कॉलेज प्राचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज ने बताया, गोलू की तैनाती के बाद स्थिति में जबरदस्त सुधार आया है। बंदरों का उत्पात लगभग खत्म हो गया और छात्र-छात्राएं अब बेफिक्र होकर कैंपस में आवाजाही कर पा रहे हैं।

सोशल मीडिया स्टार बना… और नौकरी गई

गोलू सिर्फ सुरक्षाकर्मी नहीं, कैंपस का सेलिब्रिटी बन गया। छात्र उसके साथ सेल्फी लेने लगे, वीडियो वायरल होने लगे और देखते ही देखते गोलू सोशल मीडिया पर छा गया। लेकिन यही वायरल होना उसकी नौकरी के लिए भारी पड़ा। वन विभाग की नजर इस मामले पर पड़ी और शहर वन प्रभारी पुत्तन सिंह ने साफ कहा कि वन्यजीवों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित करना या बंधन में रखना उचित नहीं है। इसके बाद वन विभाग ने गोलू को उसके प्राकृतिक परिवेश में लौटाने का फैसला लिया और उसे कॉलेज परिसर में ही सुरक्षित तरीके से रिलीज कर दिया गया।

अब खुला घूमेगा गोलू लंगूर

गोलू अब न सैलरी पाएगा, न ड्यूटी निभाएगा। लेकिन कॉलेज परिसर में स्वतंत्र रूप से रह सकेगा। वन विभाग का मानना है कि वन्यजीवों को प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने देना उनके स्वास्थ्य और व्यवहार के लिए बेहतर होता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना ड्यूटी के गोलू बंदरों को दूर रख पाएगा? फिलहाल वन विभाग और कॉलेज प्रशासन की संयुक्त निगरानी में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

फिलहाल गोलू जो कभी 12 हजार की सैलरी वाला सिक्योरिटी गार्ड था। आज एक आजाद वन्यजीव है, जिसने अपने अनोखे किरदार से पूरे शहर में अलग पहचान बना ली है।

ये भी पढ़ें

थार सवार 4 पुलिसकर्मियों ने रिटायर्ड असिस्टेंट रजिस्ट्रार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में रौंदा
Published on:
25 Apr 2026 08:58 pm
Also Read
View All