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Alwar: अलवर लिपिक भर्ती 2013 फर्जीवाड़ा: 302 क्लर्कों की नौकरी पर संकट, 18 पर दर्ज होगी FIR

राजस्थान के अलवर में लिपिक भर्ती-2013 में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राज्य स्तरीय जांच टीम की रिपोर्ट सामने आने के बाद कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में भर्ती हुए 655 में से 302 लिपिकों की नियुक्ति संदिग्ध पाई गई है, जिन पर 15 दिन में कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
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Aug 09, 2026
alwar clerk recruitment 2013 scam
representative picture (AI)

अलवर में लिपिक भर्ती-2013 में फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाली राज्य स्तरीय जांच टीम की रिपोर्ट सामने आने के बाद कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने जिला परिषद सीईओ को पत्र लिखकर आदेश दिए हैं कि शासन सचिव ने संदिग्ध भर्तियों पर एक्शन लेने के लिए 15 दिन का समय दिया है। ऐसे में विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए 7 दिन में कार्रवाई करके रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

15 दिन में एक्शन लेने के आदेश

भर्ती पर दाग लगाने वाले दोषी अधिकारियों व कार्मिकों पर भी एक्शन लें। जांच टीम ने अलवर में 655 में से 302 लिपिकों की नियुक्ति को संदिग्ध मानते हुए इन 302 लिपिकों की सुनवाई 15 दिन में करते हुए एक्शन लेने के आदेश दिए हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल 200 से अधिक अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ भी तीन सप्ताह में एक्शन लेकर रिपोर्ट सरकार की तरफ से मांगी गई है। साथ ही, 18 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है।

शादी करने के बाद भी विधवा कोटे से बनाया लिपिक

वर्ष 2018 में एक महिला को कटऑफ से आठ नंबर कम होने के बावजूद नौकरी दी गई। यह नियुक्ति विधवा श्रेणी में दी गई, जबकि उक्त महिला ने वर्ष 2015 में ही पुनर्विवाह कर लिया गया था। उस समय महिला ने नौकरी ज्वाॅइन नहीं की। फिर वर्ष 2022 में इसी महिला को दूसरी बार नियुक्ति आदेश जारी किए गए।

इस बार भी महिला ने ज्वाॅइन नहीं किया, जबकि दूसरी बार नौकरी दिए जाने का प्रावधान नहीं था। इस बार भी नौकरी विधवा की कटऑफ पर दी गई, लेकिन ओबीसी विधवा महिला की कटऑफ जारी ही नहीं की गई।


जांच रिपोर्ट में यह भी हुए खुलासे

विभाग की ओर से 12वीं, ग्रेजुएशन और बीएड में कंप्यूटर योग्यता को वर्ष 2018 में मान्य करने के आदेश जारी किए गए, लेकिन जिला परिषद ने वर्ष 2013 में ही लिपिक नियुक्त कर दिए, जो उस समय इस आधार पर पात्र नहीं थे। इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों को नौकरी दी गई, जो संविदा की नौकरी के दौरान ही दूसरे राज्यों और जिलों से कंप्यूटर की डिग्री लाए और उनके अनुभव अवधि ओवरलैप हो रही है।

वर्ष 2017 और 2022 में भी जबरदस्त गड़बड़ियां हुईं। तीन से चार आवेदकों की ओर से आवेदन शुल्क जमा करने तक का साक्ष्य नहीं मिला। इसके बावजूद उन्हें लिपिक बनाया गया। अब इस पूरे मामले में सख्त एक्शन देखने को मिल सकता है।

Updated on:
09 Aug 2026 11:57 am
Published on:
09 Aug 2026 11:57 am