
कलक्ट्रेट सभागार में निकाली आरक्षण लॉटरी (फोटो - पत्रिका)
अलवर जिले की चार पंचायत समितियों में प्रधान पद का आरक्षण बदलने से मौजूदा प्रधानों के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। रैणी, रामगढ़, थानागाजी और राजगढ़ पंचायत समितियों में अब प्रधान पद की आरक्षित श्रेणी बदल गई है। ऐसे में वर्तमान प्रधानों के सामने अपनी मौजूदा सीट से दोबारा प्रधान बनने के बजाय नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है।
रैणी पंचायत समिति में राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधायक मांगेलाल मीणा की पत्नी मीरा देवी मीणा सामान्य सीट से प्रधान बनी थीं। अब रैणी पंचायत समिति में प्रधान पद का आरक्षण ओबीसी के लिए हो गया है। ऐसे में मीरा देवी मीणा के लिए उसी सीट से दोबारा प्रधान पद की दावेदारी की राह बंद हो गई है।
इसी तरह राजगढ़ पंचायत समिति में सामान्य सीट से भौंरी देवी राठौड़ प्रधान चुनी गई थीं। अब राजगढ़ में प्रधान पद एसटी अनारक्षित श्रेणी में चला गया है। आरक्षण बदलने के बाद मौजूदा प्रधान के सामने भी नए विकल्प तलाशने की स्थिति बन गई है।
थानागाजी पंचायत समिति में जयप्रकाश प्रजापत ओबीसी सीट पर प्रधान चुने गए थे। अब यहां प्रधान पद का आरक्षण एसटी महिला वर्ग के लिए हो गया है। इससे जयप्रकाश प्रजापत भी अपनी मौजूदा सीट से प्रधान पद के लिए दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
रामगढ़ पंचायत समिति में वर्तमान में कांग्रेस के नसरू खां प्रधान हैं। रामगढ़ में अब प्रधान पद एससी अनारक्षित श्रेणी में चला गया है। आरक्षण बदलने के बाद नसरू खां के सामने भी नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती है।
आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव के परिसीमन और जिलों के पुनर्गठन का असर जिला परिषद की राजनीति पर भी दिखाई देगा। अलवर जिला परिषद के वर्तमान जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर इस बार अलवर जिला परिषद क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। उनका पिछला निर्वाचन क्षेत्र कोटकासिम अब खैरथल-तिजारा जिले का हिस्सा बन चुका है।
जिले के पुनर्गठन के बाद छिल्लर को अब खैरथल-तिजारा जिला परिषद क्षेत्र में नई राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी। यानी पंचायत चुनाव में बदले आरक्षण और परिसीमन ने कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों के सामने नए सिरे से राजनीतिक समीकरण बनाने की स्थिति पैदा कर दी है।
यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब हाल ही में बलबीर सिंह छिल्लर की पत्नी प्रेम देवी ने नीमराणा नगर पालिका के चेयरमैन पद का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब आगामी पंचायत चुनाव में आरक्षण और बदले भौगोलिक समीकरणों के बीच इन नेताओं की अगली राजनीतिक रणनीति पर नजर रहेगी।
Updated on:
24 Sept 2026 12:57 pm
Published on:
24 Sept 2026 12:56 pm
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