
पचपदरा स्थित रिफाइनरी से उत्पादित पेट्रोल और डीजल को बेचने के लिए प्रदेशभर में नए पेट्रोल पंपों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से 47 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से उपलब्ध भूमि का विवरण और नक्शा मांगा है। अलवर के राजर्षि महाविद्यालय, जीडी कॉलेज तथा राजकीय आईटीआई भी इस सूची में शामिल हैं। भूमि का आकलन कर उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा, ताकि भविष्य में रिफाइनरी के ईंधन की सुगम आपूर्ति और बिक्री व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।
जैसे ही यह जानकारी सामने आई, जिले के शिक्षा जगत और खेल प्रेमियों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि पेट्रोलियम विभाग के पत्र के आधार पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से यह जानकारी मांगी है कि उनके परिसर में कितनी भूमि उपलब्ध है और उसका उपयोग किस प्रकार हो रहा है।
इस प्रक्रिया को पचपदरा रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल-डीजल की बिक्री के लिए प्रस्तावित नए पेट्रोल पंपों की योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रोफेसर(डॉ) रामानंद यादव, पूर्व छात्रों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से कॉलेजों की भूमि को पेट्रोल पंपों के लिए उपयोग में नहीं लेने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा जाएगा।
शिक्षाविदों और पूर्व विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेजों की भूमि केवल वर्तमान उपयोग के लिए नहीं होती, बल्कि भविष्य में भवन विस्तार, नई प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं, खेल सुविधाएं, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक अधोसंरचना विकसित करने के लिए सुरक्षित रखी जाती है। उनका तर्क है कि किसी भी शिक्षण संस्थान की भूमि को अनुपयोगी मानना उचित नहीं होगा।
राजर्षि महाविद्यालय के खेल मैदान के आसपास पेट्रोल पंप बनने की स्थिति में खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं जीडी कॉलेज परिसर या उसके आसपास पेट्रोल पंप खुलने पर छात्राओं की सुरक्षा, बढ़ते यातायात, प्रदूषण और संभावित सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी केवल भूमि का विवरण मांगा गया है और अंतिम निर्णय संबंधित विभागों की स्वीकृति के बाद ही होगा। लेकिन इस सम्बन्ध सर्वे का शिक्षा जगत और खेल प्रेमियों ने विरोध किया है।