
Alwar: अब वो दिन दूर नहीं जब गांवों में भी रहने और सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए आपको टैक्स चुकाना होगा। ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बजट के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार एक नई टैक्स व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के तहत गांवों में रहने वाले हर परिवार से सालाना लगभग 1200 रुपये टैक्स वसूलने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए जल्द ही गाइड लाइन जारी हो सकती है।
दरअसल, केंद्र सरकार के 16वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि ग्राम पंचायतों को केवल सरकारी ग्रांट (बजट) पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्तर पर टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने चाहिए। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों की खुद की कमाई (राजस्व) बढ़ेगी, जिससे वे अपने गांव का विकास खुद कर सकेंगी। अलवर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सालुखे गौरव रविंद्र ने बताया कि इस टैक्स व्यवस्था को लेकर फिलहाल राज्य सरकार से विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। दिशा-निर्देश आते ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, जिन पंचायतों ने स्थानीय स्तर पर राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसी पंचायतों को केंद्र सरकार से मिलने वाले सालाना विकास बजट (सरकारी ग्रांट) में कटौती की जा सकती है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार हर साल 15वें और 16वें वित्त आयोग के तहत गांवों की सड़कों, नालियों और अन्य विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये जारी करती है।
गांवों में मुख्य रूप से आवासीय (घरों) और व्यावसायिक (दुकानों/कंपनियों) भवनों पर टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा निम्नलिखित सुविधाओं पर भी शुल्क लागू हो सकता है।
लाइट टैक्स: गांवों में लगी स्ट्रीट लाइट और बिजली व्यवस्था के लिए।
सफाई टैक्स: कचरा प्रबंधन और स्वच्छता बनाए रखने के लिए।
जल उपभोक्ता शुल्क: पीने के पानी की सप्लाई के बदले।
मेला और हाट बाजार शुल्क: गांवों में लगने वाले स्थानीय मेलों और बाजारों से।
हालांकि टैक्स की बात सुनकर शुरुआत में ग्रामीणों की जेब पर थोड़ा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल सीधे गांवों की सूरत बदलने के लिए होगा। वसूले गए शुल्क से गांवों में बेहतर सड़कें, 24 घंटे बिजली, साफ पानी और बेहतर साफ-सफाई जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। अब देखना यह है कि जिला परिषद को इसकी विस्तृत गाइडलाइन कब तक मिलती है और गांवों में इसे कैसे लागू किया जाता है।