
जिले में गुरु पूर्णिमा का पर्व बुधवार को धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकार के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। श्रद्धालुओं ने विभिन्न आश्रमों और मंदिरों में पहुंचकर अपने गुरुओं का चरण वंदन किया, आशीर्वाद लिया और पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित हुए। वहीं शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासनिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष आयोजन किए गए। पौधरोपण, जागरूकता कार्यक्रम और हरित संदेश के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के इस संगम ने गुरु पूर्णिमा पर्व को विशेष बना दिया।
सकट कस्बे के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तहत सघन पौधरोपण अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई मानव श्रृंखला रही। स्कूली बच्चों ने मैदान में एकत्र होकर 'गुरु' शब्द के आकार में मानव श्रृंखला बनाई और लोगों को पेड़ों की रक्षा करने व प्रकृति को हरा-भरा रखने का बहुत ही सुंदर संदेश दिया। इसके बाद विद्यार्थियों और अतिथियों ने मिलकर स्कूल परिसर तथा खेल मैदान के चारों तरफ दर्जनों छायादार और फलदार पौधे लगाए।
इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य पूरण चंद मीना, शिक्षिका ऊषा शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि फूल चंद सैनी, पूर्व मंडल अध्यक्ष कमल जैन, रामस्वरूप बाबूजी, मुरारी लाल जैमन, हरिकिशन मीणा, गुरु सहाय सैनी, श्रीकृष्ण मीणा और पीढ़ी मीणा सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की जमकर सराहना की।
दूसरी ओर, रैणी क्षेत्र में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। रैणी तहसील और पंचायत समिति परिसर में हुए इस आयोजन में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में भाजपा प्रत्याशी बन्नाराम मीना, एसडीएम हरकेश मीणा, तहसीलदार त्रिवेणी श्याम शर्मा और विकास अधिकारी नरेन्द्र मीणा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर प्रकृति और गुरु दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का इससे बेहतर माध्यम नहीं हो सकता। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण तैयार करना है। अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि एक मां की तरह उनकी देखभाल करने का संकल्प भी लें। दिनभर चले इन कार्यक्रमों से पूरे जिले में पर्यावरण चेतना का एक सकारात्मक संदेश गया।