
रूपबास के रूपहरि मंदिर में शनिवार की रात वह घड़ी आ ही गई जिसका भक्तों को पिछले कई दिनों को इंतजार था। वह अवसर था भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया के विवाह का। देवशयन एकादशी के अवसर पर शनिवार को रात करीब 11 बजे भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया का विवाह संस्कार कराया गया। इस दौरान पंडितों ने वेदमंत्रों का पाठ किया।
दूल्हा और दूल्हन को बहुत ही सुदंर श्रृंगार किया गया था। जैसे ही माता जानकी व जगन्नाथ का वरमाला महोत्सव हुआ पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। विवाह संस्कार से पूर्व माता जानकी को बैंडबाजे के साथ मंदिर तक लाया गया। विवाह के अवसर पर रूपबास के ग्रामीणों ने माता जानकी को बेटी मानकर कन्यादान किया। किसी ने कपडे तो किसी ने गहने व घरेलू उपयोग का सामान
व नगद राशि माता को भेँट की।
दूसरी तरफ रूपबास गांव की महिलाएं अपने हाथों से व्यंजन बनाकर भगवान जगन्नाथ के लिए लेकर आई। महिलाएं जवाई की तरफ खातिरदारी करने में दिन भर जूटी रही। यहां की महिलाएं सामूहिक रूप से पारंपरिक मीणा वाटी गीत गाते हुए मंदिर तक पहुंची। देवशयन एकादशी के अवसर पर भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को भगवान विष्णु के चर्तुभुज रूप में दर्शन दिए। जिसमें चार हाथ व चक्र की झांकी सजाई गई। साल में एक बार देवशयन एकादशी पर ही भगवान के यह दर्शन होते हैं।
महंत राजेंद्र शर्मा ने बताया कि अलवर में ही ऐसी परंपरा है कि भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया को विष्णु व लक्ष्मी का स्वरूप मानते हुए इनका हिंदू रीति रिवाज से विवाह करवाया जाता है। यही विशेषता इसे देश की अन्य रथयात्राओं से अलग बनाती है। इससे पूर्व सुबह 9 बजे पुराना कटला जगन्नाथ मंदिर से माता जानकी की सवारी बैंडबाजे के साथ रवाना हुई। जिसमें महिलाएं रथ के साथ साथ मांगलिक गीत गाते हुए चल रही थी। इस दौरान करीब पांच सौ महिलाओं की कलश यात्रा निकाली गई।
रथयात्रा के दौरान महिला श्रद्धालु भक्तिमय भजनों पर नृत्य करते हुए चल रही थी, वहीं बुजूर्ग महिलाएं माता जानकी के रथ के पीछे पीेछे चल रही थी। ठीक उसी तरह से जिस तरह से बेटी की विदाई के दौरान महिलाएं उसे घर के बाहर तक छोड़ने आती हैं। माता जानकी की रथयात्रा सर्राफा बाजार, बजाजा बाजार, होपसर्कस, चर्च रोड, कंपनी बाग, नंगली सर्किल से होते हुए रूपबास पहुंची। रास्ते में जगह जगह पर पुष्प वर्षा से स्वागत किया गय। रथयात्रा का मुख्य आकर्षण पंजाब की पाइप बैंड रही।
संयुक्त व्यापारी महासंघ की ओर से शहीद स्मारक के सामने संचालित सात दिवसीय शीतल जल प्याऊ पर हजारों की संख्या में शामिल महिला श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए शीतल नींबू पानी, फ्रूट एवं लड्डू प्रसाद का वितरण किया गया। महासंघ के अध्यक्ष हरमीत सिंह मेंहदीरत्ता ने बताया कि 27 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा की वापसी के अवसर पर महाआरती एवं बाहर से आए विशेष कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा।
दूसरी तरफ अलवर जिला व्यापार महासंघ की ओर से माता जानकी की रथ यात्रा का स्वागत पुष्प वर्षा करके किया गया। अध्यक्ष रमेश जूनेजा ने बताया कि यात्रा में कलश लेकर चल रही महिला श्रद्धालुओं का पुष्प बरसा कर स्वागत किया गया तथा शिकंजी पिलाने के साथ साथ फल वितरण किया।
जगन्नाथ मेले के अवसर पर शनिवार को भगवान के विवाह उत्सव पर कटी घाटी, भूगोर से लेकर मिनी सचिवालय तक जगह जगह पर भंडारे लग रहे थे, जिसमें श्रद्घालुओं को प्रसाद वितरण किया जा रहा था। ठंडाई, शर्बत, लस्सी आदि की प्याऊ लगी हुई थी। जिसमें छोटे से लेकर बुजूर्ग तक सेवा देने में तत्पर नजर आए।
रूपबास में भरने वाले मेले में सुबह तेज धूप व गर्मी के चलते लोगों की भीड़ कम रही लेकिन शनिवार को भारी भीड़ रही जो देर रात वरमाला महोत्सव तक जारी रही। बच्चों ने बडे़ बडे़ झूलों का खूब आनंद लिया। महिलाओं ने खूब खरीदारी की।