
अलवर शहर के पुराना कटला, सुभाष चौक स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर मंदिर में माता जानकी की पारंपरिक 'मुंह दिखाई' की रस्म निभाई गई, जिसे देखने और पूजा-अर्चना करने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में जुटने लगे।
इस धार्मिक आयोजन में विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। मुंह दिखाई की परंपरा के तहत महिलाओं ने माता जानकी को नई और आकर्षक पोशाकें, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, आभूषण तथा अन्य शृंगार सामग्री भेंट की। मंदिर परिसर में महिलाएं ढोलक की थाप पर पारंपरिक भजन और कीर्तन गाती नजर आईं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर में 11 विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए भव्य हवन-अनुष्ठान से हुई। हवन कुंड में आहुतियां देकर विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में एक विशाल ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न प्रमुख मंदिरों से आमंत्रित 151 पंडितों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा पर भगवान श्री जगन्नाथ को ही अपना परम गुरु मानकर उनका पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने इस परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा माता जानकी को जो पोशाक और श्रृंगार सामग्री भेंट की जाती है, उसे बाद में जरूरतमंद महिलाओं को प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना करने वाली महिलाओं को यह शृंगार सामग्री प्रसादी के तौर पर दी जाती है। ऐसी अटूट मान्यता है कि माता जानकी का यह आशीर्वाद पाने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
इस पावन अवसर पर अलवर से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी मंदिर के पुजारी के नाम शॉल और प्रशस्ति पत्र भेजकर गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अपने बधाई संदेश में केंद्रीय मंत्री ने गुरु परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु समाज और राष्ट्र के सच्चे पथप्रदर्शक होते हैं। उन्होंने संतजनों और धर्मगुरुओं के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा समाज को निरंतर सही दिशा दिखाने के लिए उनके सतत मार्गदर्शन की कामना की। दिनभर चले इस भक्तिमय आयोजन में शहर के कई गणमान्य नागरिक और हजारों की संख्या में स्थानीय श्रद्धालु शामिल हुए।