
अलवर जिले में नटनी का बारा से अलवर तक बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 248-ए के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। पीडब्ल्यूडी एनएच की देखरेख में करीब एक साल पहले इस हाईवे का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। लंबे समय तक जर्जर स्थिति में रहने के बाद जैसे-तैसे इसका 60 फीसदी काम दो महीने पहले पूरा हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश ने इसकी गुणवत्ता की धज्जियां उड़ा दीं। करीब 8 किलोमीटर के दायरे में हाईवे की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि सड़क कम और गिट्टी-मलबे का ढेर ज्यादा नजर आ रही है।
हाईवे की सबसे ज्यादा खस्ताहाल स्थिति उमरैण, धर्मपुरा, सावड़ी, माधोगढ़ और अकबरपुर इलाकों में देखने को मिल रही है। माधोगढ़ से अकबरपुर के बीच तो सड़क कई जगहों से गायब हो चुकी है और वहां केवल रोड़ी बिखरी पड़ी है। हल्की सी बारिश होते ही डामर की परत बह गई और घटिया सामग्री साफ नजर आने लगी। इसके चलते इस मार्ग पर चलने वाले वाहन चालकों को हर पल दुर्घटना का डर सताता रहता है और क्षेत्रीय जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग पिछले डेढ़ साल से जनता के लिए लगातार आफत बना हुआ था। पहले जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब महीनों तक धूल के भारी गुबार उड़ते रहे, जिससे लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया था। इसके बाद जब विभाग ने आनन-फानन में काम पूरा करने की जल्दबाजी दिखाई, तो उसमें निर्माण की गुणवत्ता को पूरी तरह किनारे कर दिया गया। यही वजह रही कि मामूली बारिश भी यह सड़क सहन नहीं कर पाई।
माधोगढ़ निवासी हरिओम गुर्जर और पेमाराम सैनी समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने पहले भी अधिकारियों को पत्र लिखे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि भ्रष्टाचार की वजह से ही यह हाईवे दो महीने भी नहीं टिक पाया। इस संबंध में जब एक्सईएन वेद प्रकाश शर्मा से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।