सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। हालात यह है कि प्रशासन की उदासीनता के चलते एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जनाना अस्पताल की लिफ्ट ठीक नहीं हो सकी है।
अलवर.
सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। हालात यह है कि प्रशासन की उदासीनता के चलते एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जनाना अस्पताल की लिफ्ट ठीक नहीं हो सकी है। यह हाल तो तब है जब अस्पताल प्रशासन ने यूआईटी को 43 लाख रुपए का भुगतान कर दिया है। कई बार रिमांइडर भेजने के बाद भी लिफ्ट को सही नहीं करना विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है।
एक साल पहले तत्कालीन कलक्टर पुखराज सेन ने नगर विकास न्यास के अधिकारियों से जनाना अस्पताल का विजिट कर एक सप्ताह में लिफ्ट की मरम्मत कराने और खर्चा अधिक आने की स्थिति में तुरंत नई लिफ्ट लगाने के आदेश दिए थे। अब वर्तमान कलक्टर भी निर्देश दे चुके हैं, लेकिन जूं तक नहीं रेंग रही।
यूआईटी अधिकारियों ने फरवरी में जनाना अस्पताल का विजिट किया था। इसके बाद जनाना अस्पताल की लिफ्ट, सामान्य अस्पताल के 4 बड़े वार्डों व शिशु अस्पताल का सेंट्रल एसी ठीक करने के लिए अस्पताल प्रशासन को तकमीना बनाकर भिजवाया गया। वहीं, जून के प्रथम सप्ताह में अस्पताल प्रशासन की ओर से 43 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि कलक्टर को जुलाई तक लिफ्ट को सही करने की बात कही गई थी।
अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और गायनी वार्ड ऊपरी मंजिल पर स्थित है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को ऊपर के वार्डों में जाने के लिए परेशान होना पड़ता है। यही नहीं ऑपरेशन के लिए मरीज को रैम्प के जरिए स्ट्रेचर पर खींच कर ले जाने और ऑपरेशन के बाद पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड तक वापस लाने के लिए स्टाफ को भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में कई बार स्ट्रेचर पलटने की भी आशंका रहती है।
महिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 250 से 300 महिलाएं प्रतिदिन इलाज के लिए आ रही है। साथ ही करीब 80 से 100 नई भर्तियां हर दिन हो रही है। इसके अलावा करीब 35 से 40 प्रसव रोज हो रहे हैं। इसमें 8 से 10 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं। वहीं, अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर ऊपरी मंजिल और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड भूतल पर िस्थत है। इसके कारण मरीज को स्ट्रेचर से ऑरेशन थिएटर तक ले जाने और वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। साथ ही आईसीयू में करीब 8 से 10 और गायनी वार्ड में करीब 20 से 25 महिलाओं को भर्ती किया जा रहा है। जिन्हें सीढि़यां चढ़ कर वार्ड तक जाना पड़ रहा है।