
पुलिस विभाग में आमजन की शिकायतों और परिवादों के निस्तारण को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी गई है। अब पुलिस के पास पहुंचने वाली शिकायतों को वर्षों तक लंबित नहीं रखा जा सकेगा। परिवाद का निस्तारण अधिकतम 14 दिन में करना अनिवार्य होगा।
यदि किसी मामले में तय समय में अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाती है तो संबंधित अधिकारी को 14 दिन के भीतर अंतरिम रिपोर्ट भेजकर अब तक की कार्रवाई, लंबित बिंदुओं और अंतिम निस्तारण में लगने वाले समय की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। नई एसओपी लागू करने के आदेश सभी पुलिस अधिकारियों को डीजीपी की ओर से जारी किए गए हैं।
नई एसओपी के तहत डीजीपी कार्यालय में प्राप्त होने वाले परिवादों की सीसीटीएनएस के माध्यम से मॉनिटरिंग होगी और इसी माध्यम से संबंधित जिला या रेंज से रिपोर्ट भी प्राप्त की जाएगी। इससे शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया में प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय होगी। डीजीपी कार्यालय से भेजे गए परिवादों पर महानिदेशक पुलिस कार्यालय-जन सुनवाई अंकित की जाएगी।
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि किसी परिवाद की अंतिम रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेजने से पहले जिला स्तर पर कम से कम पुलिस उप अधीक्षक रैंक का अधिकारी परिवादी को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर अब तक की गई कार्रवाई से अवगत कराएगा। इसकी जानकारी अंतिम रिपोर्ट में भी दर्ज करनी होगी।
यानी अब शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दिए बिना परिवाद बंद नहीं किया जा सकेगा। वहीं, जिला और रेंज स्तर पर परिवादों की निगरानी के लिए एएसपी स्तर के अधिकारी को जीआरओ नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी सीसीटीएनएस और राजकॉप सिटीजन ऐप पर लंबित शिकायतों की मासिक निगरानी करेगा।
नई एसओपी केवल डीजीपी कार्यालय से भेजे गए परिवादों तक सीमित नहीं है। पुलिस थाने, वृत्त, जिला और रेंज स्तर पर व्यक्तिगत रूप से मिलने वाली शिकायतों के साथ-साथ ई-मेल, सीसीटीएनएस, राजकॉप सिटीजन ऐप और अन्य माध्यमों से प्राप्त सभी परिवाद सीसीटीएनएस पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इन शिकायतों का भी 14 दिन में निस्तारण करना होगा।
डीजीपी कार्यालय से भेजे गए परिवाद पर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं मिलने की स्थिति में जिला पुलिस अधीक्षक को पांच दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने के लिए स्मरण पत्र जारी करना होगा। इसके बाद भी अनुपालना नहीं होने पर कार्रवाई सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी संबंधित रेंज के महानिरीक्षक पुलिस की होगी। जिला और रेंज स्तर पर लंबित परिवादों की नियमित समीक्षा भी होगी। जिला स्तर पर नामित जीआरओ को प्रत्येक माह कम से कम एक बार सभी थानाधिकारियों और वृत्ताधिकारियों के साथ लंबित शिकायतों और मासिक निस्तारण की समीक्षा बैठक करनी होगी।
नई व्यवस्था में क्षेत्राधिकार को लेकर शिकायतों के लंबित रहने पर भी रोक लगाने का प्रयास किया गया है। यदि कोई परिवाद संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकार से बाहर का पाया जाता है तो उसे तुरंत संबंधित क्षेत्र में भेजना होगा। क्षेत्राधिकार को लेकर किसी तरह का विवाद होने पर निर्णय संबंधित जीआरओ करेगा।