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Alwar News: राजस्थान में 147 तो अलवर में 190 फीसदी पहुंचा भूजल दोहन

राजस्थान में भूजल संकट गहराता जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 147.11 फीसदी भूजल दोहन हो रहा है, जिससे राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। सबसे बुरी स्थिति अलवर की है, जहां जमीन से 190 फीसदी पानी निकाला जा रहा है।
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Jul 23, 2026
rajasthan groundwater crisis alwar
representative picture (AI)

भूजल के अति दोहन वाले राज्यों में राजस्थान दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। इस मामले में पंजाब ही राजस्थान से आगे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकारों के संयुक्त वार्षिक भूजल संसाधन आकलन-2025 में यह बात सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्ष 2025 में भूजल निकासी का स्तर 147.11 फीसदी दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है।

वहीं, अलवर जिला भी पानी का अति दोहन कर रहा है। यहां भूजल दोहन 190 प्रतिशत पर पहुंच गया है। बोर्ड के वार्षिक भूजल आकलन-2025 के अनुसार देशभर में भूजल दोहन की दर में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर भूजल निकासी 60.48 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 60.63 फीसदी हो गई है। हालांकि यह वर्ष 2017 के 63.33 फीसदी के मुकाबले कम है, लेकिन कई राज्यों में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।

राजस्थान के हालात चिंताजनक

राजस्थान की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में भूजल निकासी का स्तर 147.11 फीसदी है। यानी जितना भूजल प्राकृतिक रूप से वापस जमीन में पहुंच रहा है, उससे कहीं अधिक मात्रा में पानी निकाला जा रहा है। पंजाब में भूजल दोहन 156.36 फीसदी और हरियाणा 136.75 फीसदी के साथ देश के सबसे अधिक भूजल दबाव वाले राज्यों में शामिल है। इसके अलावा दिल्ली में 92.10 फीसदी, पुडुचेरी में 75.98 फीसदी, तमिलनाडु में 73.50 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 70 फीसदी, चंडीगढ़ में 67 फीसदी और कर्नाटक में 66.49 फीसदी का स्तर दर्ज किया गया।

यह है देशभर का हाल

रिपोर्ट के अनुसार, देश की 7,262 मूल्यांकन इकाइयों में से 730 इकाइयां (10.08 फीसदी) अति दोहित श्रेणी में हैं। इसके अलावा 201 इकाइयां (2.97 फीसदी) गंभीर, 758 इकाइयां (11.21 फीसदी) अर्ध-गंभीर तथा 127 इकाइयां (1.88 फीसदी) लवणीय श्रेणी में रखी गई हैं। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में क्षेत्रों में भूजल का दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण की क्षमता से अधिक हो चुका है।

इसलिए बढ़ रहा भूजल दोहन

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे शुष्क राज्य में कृषि, पेयजल और उद्योगों की बढ़ती मांग के बीच भूजल पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन और भूजल पुनर्भरण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया तो आने वाले समय में कई क्षेत्रों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।


राजस्थान के सबसे अधिक भूजल दोहन वाले जिले

जिला- भूजल दोहन-स्थिति

  • जैसलमेर 321.84% देश में सबसे अधिक भूजल दोहन वाला जिला
  • झुंझुनूं 200% से अधिक अति दोहित
  • सीकर 200% से अधिक अति दोहित
  • चूरू 200% के आसपास अति दोहित
  • नागौर 180% से अधिक अति दोहित
  • अलवर 190% से अधिक अति दोहित
  • जयपुर 170% से अधिक अति दोहित
  • दौसा अधिकांश ब्लॉक अति दोहित गंभीर स्थिति
Updated on:
23 Jul 2026 11:50 am
Published on:
23 Jul 2026 11:50 am