अलवर

राजस्थान निकाय चुनाव: 13 अगस्त को लॉटरी से तय होगा महापौर और जिला प्रमुख का आरक्षण

राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों की हलचल तेज हो गई है। 13 अगस्त को जयपुर में लॉटरी निकालकर यह तय किया जाएगा कि प्रदेशभर में महापौर, जिला प्रमुख, सभापति और अध्यक्ष के पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। इस फैसले पर अलवर समेत पूरे प्रदेश के दिग्गजों की नजरें टिकी हैं।
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Aug 11, 2026
rajasthan local body elections
representative picture (AI)

प्रदेशभर की जिला परिषदों के जिला प्रमुख और नगरीय निकायों के महापौर, सभापति व अध्यक्ष पद के लिए 13 अगस्त को जयपुर में निकाली जाएगी। इसमें अलवर से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस व भाजपा के नेता शामिल होंगे। अभी अलवर में जिला प्रमुख का पद ओबीसी और महापौर का पद सामान्य वर्ग के खाते में है।

अभी तक वार्डों के आरक्षण की लॉटरी की तारीख तय नहीं है। अलवर में 16 को गृहमंत्री अमित शाह का दौरा है। इसमें सीएम भजन लाल शर्मा सहित कई केंद्रीय व राज्य सरकार में मंत्री अलवर आएंगे। यहां पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास होगा। इसके चलते पूरा महकमा अभी इस दौरे की तैयारी में जुटा है। ऐसे में वार्ड आरक्षण की लॉटरी 16 के बाद ही निकलने की संभावना है।

कई नेताओं का भविष्य होगा तय

जिला प्रमुख और महापौर के पद के आरक्षण की लॉटरी से कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी तय होगा। कई नेता दिल्ली और जयपुर में दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन लॉटरी किसके खाते में जाएगी यह भविष्य के गर्भ में है। अलवर में अभी बलवीर छिल्लर जिला प्रमुख हैं, जबकि घनश्याम गुर्जर निवर्तमान महापौर हैं। छिल्लर ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए।

कार्यकाल के बीच में परिषद से नगर निगम बना

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में अलवर नगर परिषद को नगर निगम में क्रमोन्नत किया गया था। उस समय कांग्रेस का बोर्ड बना था और सभापति बीना गुप्ता बनी थी। जब गुप्ता पर आरोप लगे तो काेर्ट के आदेश पर भाजपा के उप सभापति घनश्याम गुर्जर को महापौर बना दिया गया।

बदल सकता है राजनीतिक समीकरण

इस बार जिला परिषद और नगर निगम में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा नया जिला बनने के बाद अलवर जिला परिषद में केवल 29 जिला पार्षद बचे हैं। ओबीसी बैल्ट इन दोनों नए जिलों में चला गया है। ऐसे में जिला प्रमुख की सीट एससी या एसटी के खाते में जा सकती है।


इससे पहले 2005 में एससी के खाते में यह सीट रही, तब वर्तमान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जिला प्रमुख बने थे। उनके विधायक बनने के बाद रामलाल वर्मा जिला प्रमुख बने थे। अनुसूचित जनजाति के खाते में यह सीट आज तक नहीं गई है। वहीं, नगर निगम महापौर की सीट ओबीसी वर्ग के खाते में जा सकती है। यही वजह है कि इन दोनों वर्गों के नेता लॉबिंग में जुटे हैं।

Updated on:
11 Aug 2026 12:38 pm
Published on:
11 Aug 2026 11:39 am